प्रकृति प्रेमी कुंवर बर्तवाल मैं आज सभी के, करुण स्वर सुन चुका। पर मेरी वेदना, कोई गा न सका।। ये...
कविता
क्या वो भी.... क्या वो भी मुझे उतना ही याद करती होगी, जितना मैं करता हूं क्या वो भी मुझसे...
पंद्रह अगस्त की बेला पंद्रह अगस्त की बेला पर झण्डा ऊंचा फहरायेंगे नत् मस्तक हो जायेंगें सब सर अपना झुकायेंगे।...
खोखली नींव लगता था आज सारे जहाँ की, खुशी बेशुमार हो गयी। नहीं दी परीक्षा अपने लिए, फिर भी खुशियों...
गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी हे वसुंधरा के महान सपूत, तेरे गीत हृदय गुंजन करें। कंठ में मिठास शहद की...
गीत आपके यों ही गूंजें।। जन्मदिवस की शुभकामना, मेरी भी श्री नेगी जी को। निपट डालडे के बीच सुशोभित, शुद्ध...
मेहनत करना सीख ले जीना है यदि इस जीवन में तो, आंसू बहाना छोड़ दे। पथ पर आगे बढ़ना है...
क्या क्या लिखूँ आज मेरे दर्वित हृदय में उठ रही, क्यों एकअजीब हूक सी। क्या क्या लिखूँ, किस किस पर...
जीवन भी क्या है जीवन की भी क्या हैअजब कहानी, कभी सुख दुःख कभी आँखो में है पानी। जो सह...
ऐ वक्त ऐ वक्त सृजन... शान्ति ... सुकून .... गांव लौटा दे मुझे ऐ वक्त वो स्कूल का विद्यार्थी जीवन...
