राष्ट्र भाषा हिन्दी जन-गण-मन की अभिलाषा राष्ट्र भाषा हिन्दी, भारत मां के ललाट पर चमकती यह स्वर्ण बिन्दी, भारतीय भाषाएं...
कविता
घर जिसमें सब मिलकर रहते उसको कहते है सब घर । जिसमें ताऊ ,चाचा रहते उसको कहते है सब घर।...
जूगनूं नहीं डरता मैं अंधेरे से मैं तो प्रकाश देता सबको एक छोटा-सा उजाला देकर मैं राह दिखाता हूं सबको...
श्रृंगार कर्याल उठ दै मेरू लाड़ू मुख हाथ ध्वैयाल सैसर त्वैन जाती श्रृंगार कर्याल। उठ दै.......................... माथा म बिंदिया सिन्दूर...
दहेज मां- बाप देते हैं हमें दूसरों के घर भेज सास ससुर भी कहे क्या लायी तू दहेज क्यों लगते...
शिक्षक शिष्य का भाग्य विधाता शिक्षक दिवस अति पावन है, सब शिक्षक जनों का अभिनंदन है। जो भी शिक्षकों को...
मन की व्यथा आज अपनी कलम से मन की व्यथा सुनाती हूं क्यों इतनी सख्त बनी मैं इसकी बात सुनाती...
अ से अ: तक... अ से अक्षर लिखना सीखो आ कर मुझसे कहना सीखो इ तना सीधा सपना देखो ई...
चरण छोड़कर मैं कहां जाऊं मैया चरण छोड़कर मैं। कहां जाऊं मैया चरण छोड़कर मैं मिलाना सहारा मुझे जब कहीं...
चांद और चांदनी एक दिन चांद ने चांदनी से आकर कहा तुम इतनी सुन्दर क्यों हो मुझको आकर तो बतला...
