उत्तरायण में पुन: अभिनंदन है। बाल सूर्य उदित मकर राशि में, शैल शिखर सब अनुरंजित हैं। सुरकुट पर्वत तिरछी किरणों...
साहित्य
यह सतरंगी संस्कृति भारत की, पर्व लोहड़ी या हो मकर संक्रांति। आती पर्वों पर नित याद पुरानी, भारत माता की...
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। ये गाना मैने बचपन में सुना था। तब शायद इसका सही...
ना निकलेंगी कभी रात में बाहर, दो प्रमाण दिन के उजाले में सुरक्षित हैं स्त्री, जागरूकता और सम्मान ही स्त्री...
आजकल फैशन का जमाना है। इसके बगैर तो शायद ही कोई अपनी योग्यता का परिचय किसी को नहीं करा सकता।...
अक्ल के टप्पू, सिर पर बोझ घोड़े पर अप्पू। इस कहावत को मैं बचपन से ही पिताजी से मुख से...
इंजीनियर साहब जब भी दो पैग चढ़ाते थे, तो वे एक कविता को दोहराने लगते थे। जोर की आवाज में...
देहरादून में राजपुर रोड स्थित एक होटल के लॉन में लगे पंडाल में डीजे बज रहा था। भीतर वैडिंग चेयर...
नदियाँ ये मीठी मीठी सागर ये गहरे गहरे मन को मेरे लुभाते आँखों में ठहरे ठहरे पूछते हैं मुझसे नित...
मयाली पहाड़ियों के बीच में खिला बाजार फूल सा सुंदर सजीला सज रहा सजीव हो महबूब सा। सुहावनी समीर है...
