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July 6, 2026

युवा कवि विनय अन्थवाल की कविता-मयाली

युवा कवि विनय अन्थवाल की कविता-मयाली।

मयाली

पहाड़ियों के बीच में
खिला बाजार फूल सा
सुंदर सजीला सज रहा
सजीव हो महबूब सा।

सुहावनी समीर है
अमृत तुल्य नीर है
बाजार के निकट बना
गौरजा मंदिर है।

मानवों में प्रेम है,
सभ्य शिष्ट भाव है
द्वेष का न लेश है,
सबका सुंदर स्वभाव है।

गाँव का बाजार है
कुछ का रोजगार है
कोई मिलनसार है
कुछ का कुशल व्यवहार है।

प्रभात में चमक रही
पहाड़ियाँ निखर रही
छटा मनभाविनी सी लग रही
मन में उमंग है जगा रही।

कवि का परिचय
नाम -विनय अन्थवाल
शिक्षा -आचार्य (M.A)संस्कृत, B.ed
व्यवसाय-अध्यापन
मूल निवास-ग्राम-चन्दी (चारीधार) पोस्ट-बरसीर जखोली, जिला रुद्रप्रयाग उत्तराखंड।
वर्तमान पता-शिमला बाईपास रोड़ रतनपुर (जागृति विहार) नयागाँव देहरादून, उत्तराखंड।