May 12, 2021

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

साहित्य

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स्मृतियाँ स्मृतियों के पटल पर उग आए हैं, वर्तमान की चहकती इच्छाओं के गाछ अंकित हो गए हैं स्वप्निल इबारतें...

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माँ का दिल दुख बेटे का देख पिघलता क्यूँ है। देखकर चोट वो मरहम उसे मलता क्यूँ है।। होती है...

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कुछ सोच ज़रा देखो, लालच तो बुराई है। लालच ने हँसी जग की, दिन रात चुराई है।। की तुमने जमाखोरी,...

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दग्ड्यों तुम्हरी मुखड़ी मेरी इमिन्युटी बढांद तुम्हरी जिकुड़ी मेरी एंटीबाडी जमांद तुम्हरो हैंसणों मेरी वैक्सीन छ तुम्हरो ब्वन बच्याणो मेरी...