बरखा (वर्षा) आई तुम तो फैली चारों ओर हरियाली पड़ी बौछार पहली तो जन जीवन में भरी खुशहाली आते ही...
साहित्य
बचपन में मुझे जो पसंद था, काश आज भी वही होता तो शायद मैं खुश रहता। क्योंकि तब मैं ज्यादा...
व्यथा किस से कहूँ दिल की कोई हमारा नहीं। सब के सब स्वार्थी हैं कोई हम छात्रों का सहारा नहीं।...
योगी नहीं ये तो भोगी हैं। साधु नहीं ये तो स्वादु हैं। जिनका काम दूसरों को नसीहत देना है, लेकिन...
हर हर महादेव कह करके बांध शीष भगवा जब निकले हम रण को। माएँ तिलक लगा कर कहती जाओ पुत्र...
मतदान जगी जवा जगी जवा बोट धाद छों लगोणु सुण ल्यावा सुण ल्यावा सुण ल्यावा हे उत्तराखडीयों एक जुट एक...
मेरा देश मेरा मुल्क देश की एकता पर कभी आँच आने नहीं देना। दिलों में दूरियां कभी बढाने नहीं देना॥...
चलो आज एक छोटा सा कदम उठाते हैं, अपने अपने हिस्से का एक दूसरे के लिए बराबरी की झलक दिखलाते...
हिम की चादर ओढ़े पर्वत चांदी की चादर ओढ़े पर्वत, कुछ दिन निंद्रालय में होंगे। बसंत ऋतु की आहट पाते,...
लगता है कि इन नेताओं का विवाद से चोली दामन का साथ है। वो नेता ही क्या जो विवाद से...
