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July 10, 2026

राज्य आंदोलनकारियों से हो रहा है धोखा, सरकार ने हाईकोर्ट में नहीं की दमदार पैरवीः धीरेंद्र प्रताप

राज्य आंदोलनकारी मसले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार पर राज्य आंदोलनकारियों से धोखा देने का आरोप लगाया।

राज्य आंदोलनकारी मसले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार पर राज्य आंदोलनकारियों से धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट में दमदार पैरवी नहीं कर पाई। नतीजन, आंदोलनकारियों की जीविका पर संकट आ गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के लिए नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख हमेशा हीला हवाली का रहा है। नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला राज्य में पिछले 5 वर्षों से कार्यरत भारतीय जनता पार्टी की सरकार के निकम्मेपन का जीता जागता सबूत है। राज्य सरकार ने इस मामले में यदि ठीक ढंग से पैरवी की होती तो कोई मतलब नहीं था कि राज्य आंदोलनकारियों की जीविका पर संकट आता। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की इस मामले को युद्ध स्तर पर लेकर प्राथमिकता के आधार पर इसका निस्तारण करें।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभा का एक दिवसीय सत्र बुलाकर या इस मामले में अध्यादेश जारी किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है यदि सरकार ने इस मामले में तत्परता ना दिखाई वे तमाम राज्य निर्माण आंदोलनकारी संगठनों के साथ बैठक कर एक बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों की बुढ़ापे की इस अवस्था में इस प्रकार का उन पर अत्याचार किया जाना शर्मनाक बताया है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में राज्य आंदोनकारियों को सरकारी सेवा में दस फीसद क्षैतिज आरक्षण के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने बुधवार को सरकार के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि आदेश को हुए 1403 दिन हो गए। सरकार अब मोडिफिकेशन एप्लिकेशन पेश कर रही है। अब इसका कोई आधार नहीं रह गया है। सरकार की ओर से देर से दाखिल करने का कोई ठोस कारण नहीं दिया गया। यह प्रार्थना पत्र लिमिटेशन एक्ट की परिधि से बाहर जाकर पेश किया गया, जबकि आदेश होने के 30 दिन के भीतर पेश किया जाना था।