सरकार के विकास मॉडल पर सवाल: जीवितों के लिए सड़क नहीं, मृतकों के लिए मोक्ष धाम तक रास्ता नहीं: आर्येंद्र शर्मा
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सहसपुर विधानसभा के अंतर्गत बड़ोवाला के पास स्थित मोक्ष धाम की बदहाल स्थिति ने सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। आसपास के हजारों लोगों के लिए यह प्रमुख श्मशान घाट है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए आज भी न तो उचित सड़क है और न ही अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य आर्येंद्र शर्मा ने यह बात कही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वह आज मोक्ष धाम पहुंचे और उन्होंने वहां की स्थिति का जायजा लिया। आर्येंद्र शर्मा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि सरकार शायद अब विकास का ऐसा मॉडल लेकर चल रही है, जिसमें जीवित व्यक्ति सड़क के लिए इंतजार करे और मृत व्यक्ति भी मोक्ष धाम तक पहुंचने के लिए रास्ते का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां तक लोगों को कठिन और खराब रास्ते से सिर पर उठाकर ले जानी पड़ती हैं। जिस समय परिवार अपने प्रियजन को खोने के दुख में होता है, उस समय भी उसे अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मोक्ष धाम के आसपास जगह-जगह कूड़े और गंदगी के ढेर पड़े रहना व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांग्रेस नेता आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि यह केवल सड़क, सफाई या बिजली-पानी का सवाल नहीं है, बल्कि यह इंसान की अंतिम यात्रा की गरिमा और परिवार के सम्मान का प्रश्न है। सरकार को कम से कम उन स्थानों पर तो संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, जहां लोग अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मोक्ष धाम तक तत्काल सुगम सड़क बनाई जाए तथा साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शेड और अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो विकास के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी करती रहे, लेकिन बड़ोवाला का मोक्ष धाम सरकार से सिर्फ इतना पूछ रहा है—या अंतिम यात्रा के लिए भी सड़क मांगना बहुत बड़ी मांग है?
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।



