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July 10, 2026

युवा कवयित्री अंजली चंद की कविता-वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है

वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है
कर अपनी ग्लानि को वो प्रत्यक्ष
हमें बहुत कुछ सिखलाता है,
कभी कर कटु वचन से वार वो
तो कभी प्यारी सी भाषा से बतलाता है,
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है,
जिंदगी के कठिन पड़ाव को वो
संयम से निभाता है,
ले अनुभव गलतियों अपने अक्सर वो
गलतियाँ करने से हमे बचाता है,
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है
आंखों में नमी लिये वो
जब होंठों में मुस्कुराहट लाता है,
अपनी अनेकों असफ़लता को वो
बातों बातों में गिना जाता है,
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है
उदासीन सी बातों में वो
ख़ुद ही कभी कभी बह जाता है,
फिर पल में थामे अपनी संवेदनाओं को वो
बस ठहर जाता है,
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है
लिये अपने अंदर समुद्र सी धारा वो
हमे नदी सा बहना सिखलाता है,
देकर उमंग नयी सी हमे वो
अक्सर खुद को अकेला ही पाता है,
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है।
कवयित्री का परिचय
नाम – अंजली चंद
पता – बिरिया, मझौला, खटीमा जिला उधम सिंह नगर, उत्तराखंड। पढ़ाई पूरी करने के बाद अब सरकारी नोकरी की तैयारी कर रही हैं।