हिंदी दिवस पर आइटीआइ अनुदेशक राजेंद्र जोशी की कविता-हिंदी का सम्मान
हिंदी का सम्मानसुना है हिन्दी दिवस है आज,
बधाई देने का है रिवाज।
अंग्रेजी में हम सब करते गिटपिट,
कहते फिर भी हिंदी पर नाज।।
देखा है हमने यह अक्सर,
मिलता अंग्रेजी को अवसर।
हिंदी फूटी आंख न भाती,
होती है अपमानित जमकर।।
कहते हम पहचान है हिंदी,
कहें कभी माथे की बिंदी।
लेकिन जब हो रौब जमाना,
झाड़ें इंग्लिश पड़ती फीकी हिंदी।।
हिंदी हम सबकी राष्ट्रभाषा,
शब्द शब्द से जगती आशा।
कण कण में इसके बसा है भारत,
तभी तो हिंदोस्ता कहलाता।।
करना है गर इसका सम्मान,
बढ़ाओ जमकर इसका मान।
लिखो, पढ़ो और बोलो हिंदी,
भावी पीढ़ी को भी दो ज्ञान।।
कवि का परिचय
राजेंद्र प्रसाद जोशी
अनुदेशक (Instructor)
राजकीय आइटीआइ महिला देहरादून, उत्तराखंड।



