Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

April 20, 2026

एसआरएचयू में इंडियन डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन, रक्षा तकनीकों पर किया मंथन

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित एसआरएचयू स्कूल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी जौलीग्रांट में इंडियन डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने उभरती रक्षा तकनीकों, राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों और अकादमिक-रक्षा सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सोमवार को आदि कैलाश सभागार में आयोजित कॉन्क्लेव का उद्घाटन संस्थापक डॉ. स्वामी राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस दौरान एसएसटी के डीन डॉ. प्रमोद कुमार ने उपस्थित अतिथियों और विशेषज्ञों का स्वागत किया। उन्होंने अकादमिक संस्थानों और रक्षा क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते हुए छात्रों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप शोध और नवाचार में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए विशेषज्ञ डॉ. विकास कुमार ने डीआरडीओ के अंतर्गत एयरोनॉटिकल रिसर्च और रक्षा नवाचार में हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होने स्वदेशी तकनीक विकास और अकादमिक-रक्षा सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं कर्नल मयंक चौबे (सेनि.) ने रक्षा सेवाओं में नेतृत्व, अनुशासन और रणनीतिक सोच के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों के लिए करियर अवसरों और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

कुमार सुब्रमण्यम चितंबरम अय्यर (आईएनएएस) ने नौसेना की रक्षा प्रणालियों और हथियार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और नौसेना के आधुनिकीकरण पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डॉ. सूर्यनारायण विक्रांत कर्रा ने रक्षा इंजीनियरिंग और एयरोस्पेस में उन्नत मटेरियल्स की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इस क्षेत्र में अनुसंधान की संभावनाओं को समझाया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसके अलावा, डॉ. वैभव गुप्ता ने रक्षा प्रणालियों में ऑप्टिकल और सेंसिंग तकनीकों के उपयोग तथा डीआरडीओ में चल रहे नवाचारों और वास्तविक समस्याओं के समाधान के तरीकों पर प्रस्तुति दी। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का समापन डॉ. नील मणि द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *