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July 11, 2026

सिर्फ 75 रुपये में जान जाओगे आपके शरीर में एंटीबॉडी, डीआरडीओ ने बनाई डिपकोवन किट

अब कोरोना के खिलाफ जंग में डीआरडीओ को एक अहम कामयाबी मिली है। 2-डीजी जैसी दवा बनाने के बाद संस्थान मे अब कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडी डिटेक्शन किट डिपकोवन ( DIPCOVAN) तैयार की है। इसे दिल्ली के वैनगार्ड डायग्नॉस्टिक्स के सहयोग से विकसित किया गया है।

भारत में जिस गति से कोरोना का कहर बढ़ा, उसी तेजी से इससे लड़ने के लिए नए नए प्रयोग जारी हैं। अब कोरोना के खिलाफ जंग में डीआरडीओ को एक अहम कामयाबी मिली है। 2-डीजी जैसी दवा बनाने के बाद संस्थान मे अब कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडी डिटेक्शन किट डिपकोवन ( DIPCOVAN) तैयार की है। इसे दिल्ली के वैनगार्ड डायग्नॉस्टिक्स के सहयोग से विकसित किया गया है।
डिपकोवन ( DIPCOVAN) किट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि इंसान के शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी या प्लाज्मा है या नहीं। फिलहाल इस किट को 1000 से ज्यादा मरीजों पर टेस्ट किया जाएगा। आइसीएमआर (ICMR) ने इसे अप्रैल महीने में ही मंजूरी दे दी थी वहीं डीसीजीआइ (DCGI) भी इसे मई के महीने में ही मंजूरी दे चुका है। जानकारी के मुताबिक जून के पहले हफ्ते में यह प्रोडक्ट बाजार में लॉन्च हो जाएगा। हर हर टेस्ट की कीमत 75 रुपये होगी।
बता दें कि डीपकोविन, स्पाइक और नुक्लेओकैप्सिड प्रोटीन को भी डिटेक्ट कर सकता है। वो भी 97 फीसदी की उच्च संवेदनशीलता और 99 फीसदी की विशिष्टता के साथ। इस किट को 1000 से ज़्यादा मरीजो पर टेस्ट किया जाएगा। कोरोना के खिलाफ जंग में इसे अहम माना जा रहा है। वैक्सीनेशन के समय भी इसकी जानकारी से जरूरी कदम उठाए जा सकेंग।
इससे पहले लॉंच की थी कोरोनारोधी दवा
इससे पहले डीआरडीओ (DRDO) की कोरोनारोधी दवा 2-डीजी को 17 मई को लॉन्च किया गया था। संस्थान के अनुसार 2-डीजी दवा कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की जरूरत को कम करने में सहायक है। कोरोना के मध्यम और गंभीर मरीजों पर 2-डीऑक्सी-डी-ग्लुकोज (2-डीजी) दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) की ओर से मंजूरी मिली थी। रक्षा मंत्रालय ने 8 मई को कहा था कि 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) के क्लीनिकल परीक्षण में पता चला है कि इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही इस दवा से मरीज जल्दी ठीक होते हैं।