गलतफहमी में देश और राष्ट्र को एक ना समझिए, जानिए दोनों में अंतर
आमतौर पर लोग देश और राष्ट्र का मतलब एक ही समझते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि इन दोनों में अंतर है। अक्सर राष्ट्र और देश के अर्थ ( Nation And Country ) को लेकर हम अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। इसे एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है। सच ये है कि इन दोनों शब्दों के बीच अंतर है। इससे समझना बेहद जरूरी है। यह जनरल नॉलेज के लिहाज से तो जरूरी है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में आंसर लिखने के लिए भी काम आता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लोग अक्सर ‘देश’ और ‘राष्ट्र’ शब्दों को समानार्थक शब्द के रूप में इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि दोनों का अर्थ एक ही है। हालाँकि, इन दोनों शब्दों की अलग-अलग परिभाषाएँ हैं। इन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। आइए हम आपको बेहद आसान भाषा में समझाते हैं कि देश और राष्ट्र के बीच का अंतर क्या है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पहली बात तो ये है कि राष्ट्र उन लोगों के समूह को संदर्भित करता है जो भाषा, जातीयता और क्षेत्र जैसी सामान्य विशेषताओं को साझा करते हैं। दूसरी ओर देश एक संप्रभु राज्य, सरकार वाला एक भौतिक क्षेत्र या साझा इतिहास वाले लोगों के समूह से संबंधित भौगोलिक क्षेत्र को संदर्भित कर सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ऐसे में समझ लीजिए कि राष्ट्र (Nation) और देश (Country) में मुख्य अंतर यह है कि देश एक भौगोलिक और राजनीतिक इकाई (शरीर) है, जबकि राष्ट्र एक भावनात्मक और सांस्कृतिक इकाई (आत्मा) है। देश की सीमाएं, सरकार और कानून होते हैं, जबकि राष्ट्र समान संस्कृति, इतिहास या भावनाओं से बंधे लोगों का समूह होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देश के बारे में
एक देश एक भौगोलिक और राजनीतिक इकाई है। यह आमतौर पर अपनी सरकार, सीमाओं और संप्रभुता से पहचाना जाता है। यह एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय इकाई है जिसके अपने कानून और संस्थाएँ हैं।
प्रमुख देश के उदाहरण
संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, चीन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
राष्ट्र के बारे में समझिए
राष्ट्र उन लोगों के समूह को कहते हैं जो भाषा, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं जैसे सामान्य बंधनों को साझा करते हैं। यह पहचान और अपनेपन की भावना है जो व्यक्तियों को एकजुट करती है। राष्ट्र एक ही देश के भीतर मौजूद हो सकते हैं या कई देशों में फैले हो सकते हैं।
प्रमुख राष्ट्र के उदाहरण
जापानी राष्ट्र: वे लोग जो जापानी संस्कृति, भाषा और इतिहास से अपनी पहचान रखते हैं।
कुर्द राष्ट्र: कुर्द लोग एक समान भाषा और सांस्कृतिक विरासत साझा करते हैं तथा कई देशों में फैले हुए हैं।
बास्क राष्ट्र: बास्क वंश के लोग जो स्पेन और फ्रांस के क्षेत्रों में निवास करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस परिभाषा से फिर से समझिए
देश का अर्थ एक संप्रभु राज्य (Sovereign State) या निश्चित भूभाग से है, जबकि राष्ट्र एक मानसिक और सांस्कृतिक अवधारणा है।
आधार: देश भौगोलिक सीमाओं (Border) पर आधारित होता है, जबकि राष्ट्र साझा मूल्यों, परंपराओं और भावनाओं पर आधारित होता है।
पहचान: देश की एक अंतरराष्ट्रीय पहचान (जैसे- पासपोर्ट) होती है। राष्ट्र लोगों की आंतरिक पहचान है, जो सीमा पार भी हो सकती है (जैसे- भारतीय मूल के लोग)।
उदाहरण: भारत एक देश है क्योंकि इसकी अपनी सीमाएं और सरकार है, लेकिन भारतीय राष्ट्र का हिस्सा वे लोग भी हैं जो संस्कृति से भारत से जुड़े हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देश और राष्ट्र
देश एक राजनीतिक और भौगोलिक इकाई है, जिसकी सीमाएँ परिभाषित हों और सरकार मान्यता प्राप्त हो। वहीं, राष्ट्र लोगों का एक समूह जो भाषा, संस्कृति, इतिहास और जातीयता जैसी सामान्य विशेषताओं को साझा करते हैं। देश एक संप्रभु प्राधिकरण द्वारा शासित एक विशिष्ट क्षेत्र को संदर्भित करता है। राष्ट्र ऐसे लोगों के समुदाय को संदर्भित करता है जो साझा विशेषताओं के आधार पर खुद को एक एकजुट समूह के रूप में पहचानते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देशों में विभिन्न जातीय, सांस्कृतिक और भाषाई पृष्ठभूमि वाली विविध आबादी हो सकती है। वहीं, राष्ट्र प्रायः उन लोगों से बनता है जिनकी भाषा, संस्कृति और इतिहास एक समान होते हैं। देशों का निर्माण राजनीतिक प्रक्रियाओं, जैसे उपनिवेशीकरण, स्वतंत्रता आन्दोलन या विलय के माध्यम से हो सकता है। राष्ट्रों का निर्माण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या जातीय संबंधों के माध्यम से हो सकता है जो लोगों में अपनेपन और एकता की भावना पैदा करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देश अपनी सीमाओं के भीतर कई राष्ट्रों को शामिल कर सकते हैं, तथा विभिन्न समूह एक साथ रह सकते हैं। एक राष्ट्र एक ही देश के भीतर विद्यमान हो सकता है अथवा अनेक देशों (अंतरराष्ट्रीय समुदाय) में फैला हो सकता है। देशों में कानूनी और राजनीतिक प्रणालियाँ होती हैं, जो क्षेत्र और उसकी जनसंख्या को नियंत्रित करती हैं। राष्ट्रों में प्रायः साझा मूल्य, परंपराएं और आकांक्षाएं होती हैं जो राष्ट्रीय पहचान की भावना में योगदान देती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देश कूटनीति, व्यापार और राजनीतिक गठबंधन के माध्यम से एक दूसरे के साथ बातचीत करते हैं। राष्ट्र मान्यता और स्वतंत्रता की मांग कर सकते हैं। आत्मनिर्णय की वकालत कर सकते हैं। या अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकते हैं।
संक्षेप में
देश = जमीन का टुकड़ा + सरकार + बॉर्डर (Physical Entity)
राष्ट्र = लोग + साझा संस्कृति/इतिहास + भावना (Psychological Entity) (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब तो ये समझ गए होंगे आप
1- एक राष्ट्र का अर्थ लोगों के उस समूह से है जो एक समान सांस्कृतिक पहचान रखते हैं जबकि देश का अर्थ एक स्टेट से है जो स्वशासी राजनीतिक पहचान पर लागू होता है।
2- राष्ट्र का एक उदाहरण स्पेन में रहने वाले बास्क लोग हो सकते हैं, जो खुद को एक अलग राष्ट्र मानते हैं। क्योंकि वे जातीय रूप से बाकी आबादी से अलग हैं। वहीं, रूसी संघ एक ऐसा देश है, जिसमें सभी राज्य एक ही सरकार के समान कानूनों का पालन करते हैं।
3- राष्ट्र शब्द पुराने फ्रांसीसी शब्द नेसियन से आया है। इसका अर्थ है मूल स्थान। देश शब्द पुराने फ्रांसीसी शब्द ‘कॉन्ट्री’ से लिया गया है। माना जाता है कि यह शब्द 11वीं शताब्दी में इंग्लैंड के नॉर्मन आक्रमणों के दौरान अंग्रेजी भाषा में प्रवेश किया था।
4- राष्ट्र शब्द को कभी-कभी संप्रभु राज्य या देश के पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किया जाता है। संप्रभु राज्य का अर्थ है एक सरकार जो एक विशिष्ट क्षेत्र को नियंत्रित करती है। वहीं देश का अर्थ एक भौगोलिक क्षेत्र से है। इसका सरकार या जातीय समूह के साथ संबद्धता हो भी सकती है और नहीं भी। दूसरी तरफ देश को अक्सर शब्द देश एक संप्रभु राज्य को संदर्भित कर सकता है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


