जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर उत्तराखंड में वामदलों का प्रदर्शन, दून में दिया गया धरना
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से प्रभावितों की समुचित मदद, अतिक्रमण के नाम पर गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ और डंगू पर अंकुश ना लगाने के विरोध में आज उत्तराखंड के विभिन्न जिलों और शहरों में वामदलों ने धरना दिया। राजधानी देहरादून में धरना पंडित दीनदयाल पार्क पर दिया गया। इसमें तीन वामपंथी दलों सीपीआई, सीपीएम तथा सीपीआई (माले) से जुड़े लोगों ने भागीदारी सुनिश्चितकी। धरने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया गया। दून में ज्ञापन जिला प्रशासन की ओर तहसीलदार मजिस्ट्रेट सदर को दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धरने के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने भाजपा सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की। कहा कि यह सरकार राज्य विरोधी तथा पूंजीपतियों की सरकार है, जो जनतान्त्रिक मूल्यों का अनादर कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में मानसून की बारिश से लगभग पूरा ही राज्य प्रभावित हुआ है। बहुत से लोगों की जान गई और कृषि भूमि, पशुधन का भी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही चारधाम सड़क, रेलवे की परियोजना भूस्खलन से प्रभावित हुई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा कि इस बारिश ने विकास के विनाशकारी, अवैज्ञानिक, ठेकेदारी, मुनाफाखोर और प्रकृति व पर्यावरण विरोधी माडल को उजागर किया है। इसके प्रति पर्यावरणविद, वैज्ञानिक एवं राज्य की सजग आंदोलनकारी शक्तियां लगातार चेतावनियां देती रही हैं। इस आपदा से भविष्य के सबक लिए जाने चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर कहा गया कि लगातार आपदा के चलते लोगों का भारी नुकसान हुआ है। 2013 की आपदा के बाद सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने बहुत सी सिफारिशें की थीं। उसके पश्चात 2021 की आपदा ने फिर चेतावनी दी। अभी जोशीमठ की आपदा जारी है। ऐसा ही संकट राज्य के अन्य नगरों में आने की चेतावनी लगातार मिल रही हैं। मौसम के बदलाव और विकास के अवैज्ञानिक प्रयोग इस तरह की आपदाओं में वृद्धि होगी। वहीं, सरकार सोई हुई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ज्ञापन में ये की गई मांग
1. सपूर्ण राज्य के सभी आपदा प्रभावित लोगों का सही जमीनी आकलन कर तत्काल राहत एवं पुनर्वास किया जाए।
2. आपदा से प्रभावित गांवों के विस्थापन पुनर्वास की कार्यवाहीकरती शीघ्र अमल में लाई जाए।
3. आपदा से लगातार प्रभावित इस राज्य की विस्थापन एवम पुनर्वास नीति में बदलाव करते हुए उसे और व्यापक व व्यवहारिक बनाया जाए।
4. आपदा प्रभावितों को मिलने वाली अहेतुक राशि एवं मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए।
5. राज्य में विकास के माडल को वैज्ञानिक व पर्यावरण के मानकों को ध्यान में रखकर खड़ा किया जाए।
6. राजधानी देहरादून एवं इसके ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों कि हालात बद से बदतर है। जगह – जगह सड़कें क्षतिग्रस्त तथा गढ्ढायुक्त हैं। स्मार्ट सिटी आदि योजनाओं का पैसे को जमकर लूटा जा रहा है, जिसमें सतापक्ष के लोगों से लेकर अनेक कम्पनियां शामिल हैं। देहरादून शिवालिक क्षेत्र के इर्दगिर्द जुड़ी आबादी हर साल जंगलों से आने वाले पानी से भारी नुकसान उठा रही है। सरकार इस ओर बाढ़ रोकथाम की समुचित योजना नहीं बना रही है। सौंग नदी आदि नाले खाले हर साल खेती को नुकसान पहुंचा रही है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।
7.डेंगू भी राज्य में महामारी और आपदा का रूप ले चुका है । देहरादून, हल्द्वानी जैसे मैदानी इलाकों में ही नहीं, श्रीनगर (गढ़वाल) जैसे पहाड़ी नगर भी डेंगू की मार से त्रस्त हैं। बीते कुछ सालों से यह हर साल की परिघटना बन गया है, लेकिन डेंगू की रोकथाम के कोई ठोस उपाय राज्य सरकार की ओर से नहीं किए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रभावितों को भारी कीमत चुकाकर इलाज करना पड़ रहा है। कई मरीजों का तो इलाज न होने के कारण असमय मृत्यु हो चुकी है। डेंगू की रोकथाम और उन्मूलन के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
8.जिस समय राज्य के आम लोग भारी आपदा से त्रस्त हैं, उसी समय अतिक्रमण हटाने की नाम पर उनके दुकान-मकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। ऐसे कस्बे, बसासतें, व्यापारिक केंद्र भी तोड़े जा रहे हैं। जो सड़क बनने से पहले से अस्तित्व में हैं। यह सारी मार छोटे-मझोले व्यवसाय करने वालों पर है। हम यह मांग करते हैं कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों को उजाड़ने का यह क्रूर खेल बंद होना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये रहे धरने में शामिल
धरने में सीपीआई के वरिष्ठ नेता गिरिधर पण्डित, सीपीएम राज्य सचिव राजेन्द्र सिंह नेगी, सीपीआई (एम एल) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी, सीपीएम के वरिष्ठ नेता सुरेन्द्र सिंह सजवाण, इन्दु नौडियाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवप्रसाद देवली, सीपीएम जिलासचिव राजेन्द्र पुरोहित, देहरादून सचिव अनन्त आकाश, पछवादून सचिव कमरूद्दीन, माला गुरूंग, विजय भट्ट, आरयूपी के अध्यक्ष नवनित गुंसाई, सीपीआई के वरिष्ठ नेता अशोक शर्मा, एसएस रजवार, महिपाल बिष्ट, बिक्रम पुंडीर, केपी सिंह, अनिता, संगिता, साहेला, कलावती आदि शामिल रहे।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।



