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July 29, 2026

भारत में कोरोना टीके के कॉकटेल के अध्ययन को डीसीजीआइ की मंजूरी, यहां होगा क्लिनिकल ट्रायल

भारत में कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले दो मुख्य टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सिन के मिश्रण के अध्ययन को लेकर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने अपनी मंजूरी दे दी है।

भारत में कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले दो मुख्य टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सिन के मिश्रण के अध्ययन को लेकर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने अपनी मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक यह अध्ययन और इसके क्लिनिकल ट्रायल वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) में आयोजित किए जाएंगे।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की एक विषय विशेषज्ञ समिति ने 29 जुलाई को अध्ययन करने की सिफारिश की थी। यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से किए गए एक अध्ययन से अलग होगा। इसमें कहा गया था कि दो कोविड टीकों को मिलाने से बेहतर सुरक्षा और प्रतिरक्षाजनत्व परिणाम मिले। हालांकि, तब खुराक के मिश्रण ने काफी चिंता बढ़ा दी थी।
उत्तर प्रदेश में किए गए एक अध्ययन में लोगों को पहली खुराक के रूप में कोविशील्ड दिया गया था, इसके छह सप्ताह के अंतराल पर दूसरी खुराक के रूप में उन्हें अनजाने में कोवैक्सिन दिया गया था। इस विषम समूह में कुल 18 लोग शामिल थे, जिनमें दो प्रतिभागी अनिच्छुक थे और उन्हें स्टडी से बाहर कर दिया गया था। स्टडी में शामिल लोगों में 11 पुरुष थे और सात महिलाएं थीं जिनकी औसत आयु 62 वर्ष थी।
ICMR ने कहा कि इस अध्ययन ने सुझाव दिया कि एक एडेनोवायरस वेक्टर प्लेटफॉर्म-आधारित वैक्सीन के बाद एक निष्क्रिय संपूर्ण वायरस आधारित वैक्सीन न केवल सुरक्षित था, बल्कि बेहतर इम्युनोजेनेसिटी देने में सक्षम हुई। CMR के हेड ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिकेबल डिजीज, डॉ समीरन पांडा ने कहा कि हमने स्टडी में विषम समूह और समजातीय समूह के साथ तुलना की। हमें बेहतर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया मिली। अगर किसी को कोविशील्ड पहले और कोवैक्सिन दूसरी बार मिले तो यह बेहतर immune response देता है। एडिनोवेक्टर और संपूर्ण वैरिएंट टीकों के संयोजन पर यह पहला अध्ययन है। वहीं, शीर्ष चिकित्सा निकाय ने कहा कि इस बारे में अधिक विस्तृत और गहन शोध किया जाना चाहिए, क्योंकि यह अध्ययन केवल 18 प्रतिभागियों पर किया गया है।