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August 27, 2026

हिम्स में 41वां नेत्रदान पखवाड़ा, ओपीडी में मरीजों और स्टाफ को किया जा रहा जागरूक, कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के प्रति बढ़ाई जा रही समझ

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट में 41वां नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस दौरान नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने, मृत्यु के बाद नेत्रदान के महत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पखवाड़े के अंतर्गत अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों और तीमारदारों के साथ-साथ स्टाफ कर्मियों को भी नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में हिम्स की प्रिंसिपल डॉ. रेनू धस्माना ने कहा कि नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने बताया कि देश में करीब 11 लाख लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे हैं, जबकि हर वर्ष लगभग 25 से 30 हजार कॉर्निया ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं। ऐसे में नेत्रदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

डॉ. रेनू धस्माना ने कहा कि नेत्रदान एक महान सामाजिक कार्य है, जिसके माध्यम से मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला लाया जा सकता है। नेत्र रोग विभागाध्ययक्ष डॉ. हर्ष बहादुर ने कहा कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकता है, जो कॉर्नियल समस्या के कारण दृष्टिहीनता का सामना कर रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान को लेकर किसी भी तरह की भ्रांति या संकोच न रखें और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें। इस दौरान आयोजित नाटक के जरिये छात्र-छात्राओं ने लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, इसके महत्व और इससे जुड़ी आवश्यक जानकारी दी गयी साथ ही, लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।
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