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August 23, 2026

ग्राफिक एरा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि, बिना सर्जरी एलएए बंद करने में कामयाबी

देहरादून स्थित ग्राफिक एरा अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम ने एडवांस कार्डियक केयर के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 60 वर्षीय मरीज के हृदय के लेफ्ट एट्रियल एपेंडेज (एलएए) को बिना किसी सर्जरी के सफलतापूर्वक बंद कर स्ट्रोक के खतरे से जूझ रहे मरीजों के लिए इलाज की नई उम्मीद जगाई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

60 वर्षीय मरीज को क्रॉनिक एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन अनियमित होने की समस्या थी और वह पहले दो बार स्ट्रोक का सामना कर चुका था। उपचार के बाद पैरालिसिस से रिकवरी हो गई, लेकिन दोबारा स्ट्रोक का खतरा बना हुआ था। मरीज पहले से एनओएसी थेरेपी पर था, इसके बावजूद उसे बार-बार स्ट्रोक हुए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इमेजिंग जांच में एलएए का आकार 28–30 मिलीमीटर पाया गया, जिसके लिए 33 मिलीमीटर के एलएए ऑक्लूडर डिवाइस का इस्तेमाल किया गया। 3-डी इकोकार्डियोग्राफी की मदद से डिवाइस को सही स्थान पर सटीकता के साथ स्थापित किया गया। वहीं कार्डियक सीटी में एलएए के अंदर पुराना ब्लड क्लॉट भी पाया गया, जिससे प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो गई थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ऐसे चुनौतीपूर्ण मामले में ग्राफिक एरा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों डा. राज प्रताप सिंह, डा. हिमांशु राणा, डा. संदीप मालवीय और डा. आशीष सिंह ने कार्डियक एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट डा. एस.पी. गौतम और डा. पराग के सहयोग से बिना सर्जरी के हृदय के लेफ्ट एट्रियल एपेंडेज (एलएए) को सफलतापूर्वक बंद किया। बिना किसी सर्जरी के यह बड़ी कामयाबी मिली है। मरीज 24 घंटे के भीतर चलने-फिरने लगा है और तेजी से रिकवर कर रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ग्राफिक एरा अस्पताल की यह उपलब्धि प्रदेश में जटिल हृदय रोगों के आधुनिक उपचार की दिशा में ग्राफिक एरा की बढ़ती विशेषज्ञता और मजबूत होती स्वास्थ्य सेवाओं को दर्शाती है। यह प्रक्रिया बार-बार स्ट्रोक का सामना कर चुके या एंटीकोएगुलेंट दवाएं न ले पाने वाले मरीजों के लिए उपचार की नई उम्मीद लेकर आई है।
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