कवि सम्मलेन एक दिन मैं बैंठी बैठी क कवि सम्मेलन का बारा म सोचण लग्यूं मैं कबि कवि सम्मेलन म...
नारी मंच
घर जिसमें सब मिलकर रहते उसको कहते है सब घर । जिसमें ताऊ ,चाचा रहते उसको कहते है सब घर।...
जूगनूं नहीं डरता मैं अंधेरे से मैं तो प्रकाश देता सबको एक छोटा-सा उजाला देकर मैं राह दिखाता हूं सबको...
सौंण-भादौं बरखण लग्यूछ सौंण-भादौं डांडी कांठी हरी भरी ह्वैगी । गदरा गाड़ सबी बढ़ी गैंन छ्वैला पाणी फूटीगिन घर गुठ्यारियूम...
श्रृंगार कर्याल उठ दै मेरू लाड़ू मुख हाथ ध्वैयाल सैसर त्वैन जाती श्रृंगार कर्याल। उठ दै.......................... माथा म बिंदिया सिन्दूर...
दहेज मां- बाप देते हैं हमें दूसरों के घर भेज सास ससुर भी कहे क्या लायी तू दहेज क्यों लगते...
पियारी हे स्याली हे स्याली पियारी हे स्याली त्यै डांडी घुमी औंला बुरांश किंगगोडी की कछमोली बणै के खैई के...
आंख्यूं कू राज तेरी आंख्यूं कू ढ़ग बडू छ ड़ुबकी आंख्यूं कू सज बड़ू छ तेरू........................... सुख म टबणादी खुशी...
मन की व्यथा आज अपनी कलम से मन की व्यथा सुनाती हूं क्यों इतनी सख्त बनी मैं इसकी बात सुनाती...
बोल-बाबा कूं मुलक हे ऊंची डाण्डियों तुम निशी ह्वावा बाबाजी कूं मुलक देखण द्यावा। घनी कुलांई तुम निशी ह्वावा बाबाजी...
