हां हूं मैं मॉडर्न खयालो की पर जानती हूं मैं संस्कार भी, हां हूं मैं खुले विचारों वाली पर जानती...
नारी मंच
हुणत्यळि मवसि हे शिब्बू की ब्वै ! हे वीं बुढड़ी....... पर कख? क्वी जवाब ना, तब सुबदार साब। जगतराम जी...
मैं आज भी जीवित हूं तो प्रभु तेरा ही रचा ये खेल है वरना कहां मैंने भरी आज तक इतनी...
सच मानिये जब मुझे मालूम हुआ कि मेरी रिपोर्ट करोना पॉजिटिव आ गई है तो कुछ देर के लिए तो...
एक छोटा सा शब्द जिसमे मेरी जान बसती है, रोते हुए भी मेने मुकुराया हे जब मेरी माँ हंसती है...
नौ दिसंबर 2020 को लोकसाक्ष्य के माध्यम से युवा लेखिका एवं कवयित्री किरन पुरोहित ने अलकनंदा नदी को पत्र लिखा...
थोड़े से गम हैं हिस्से में अगर, खुशियां भी आएंगी कभी थोड़े गहरे से जख्म है मगर ये लाइलाज़ तो...
होली होली आई होली आई, संग खुशियों की टोली लाई। प्यार मोहब्बत और खुशियाँ लेकर आई। खुशियाँ है भरती झोली...
यूं ही रहो मेरे प्रभु आज मैं पहुंची जहां हूं, तुम मुझे लाए यहां । बात वो आती मुझे, जो...
पहचानो, अब तुम हो कौन हे ! मिट्टी की देह बता, आखिर क्या तेरा शुभ नाम । किस हेतु तू...
