पंद्रह अगस्त की बेला पंद्रह अगस्त की बेला पर झण्डा ऊंचा फहरायेंगे नत् मस्तक हो जायेंगें सब सर अपना झुकायेंगे।...
नारी मंच
मित्रता सारे रिश्ते नाते प्यारे पर स्वार्थ के आगे हारे एक सुहाना प्यारा रिश्ता जो खुद से हमने ही जोड़ा...
एक अजब-सी उलझन में उलझी पड़ी हैं ज़िन्दगी न जाने की किस मंज़िल की तरफ भागे जा रहें न जाने...
लोकतंत्र है यह कैसा? जहां चले बस तानाशाही और पैसा, मांगते जो चुनाव में वोट… छापते फिर उसपर नोट। लोकमत...
मैं एक नारी हूँ अपने हालतों पर भारी हूँ जलायी गई हूँ कई बार आग में फिर भी न हुई...
पिता ऊँगली पकड़ कर चलना उन्होंने सिखाया बुरे अच्छे में फ़र्क करना भी उन्होंने सिखाया। दुसरो की खुशिओ को तबज्जू...
संस्कृति और सभ्यताओं का समागम अगर दुनिया में कहीं है तो वो हमारे देवभूमि उत्तराखंड में है। जो हमारी देश...
ये कैसी करोना की हवा चली, इक भय बिखरा है गली गली। जब चारों ओर मरण का तांडव फिर बसंत...
बेमौसम बारिश और गरीब किसान बेचैन वो नहीं उस शख्स की जिम्मेदारी है कभी बारिश के लिए तड़पता रहा तो...
क्या लिखूं इन हालातों पर.... इन बदलते ख्यालातों पर.. सोचा क्या कभी ? क्यों ये हालात इतने बदलने से लग...
