" कुटमदरि " रऴि - मिऴि , रावा त,नांगि-कांगि , बंटे जयंद.दगड़म हो , सयंणु दिल-बोल्यूं बि , सये जयंद.....
साहित्य जगत
शरद का पूनमऋतुओं में शरद ऋतु की बात कुछ निराली है।इस ऋतु में फैली रहती चहुँ ओर हरियाली है।फल फूलों...
उठो सुमन तुम आंखें खोलो ! देखो कौन जगाने आए हैं ! त्रिहरि के महा बलिदानी देखो, त्रिहरी से मानस आए...
किसने बनाया उत्तराखंड किसका हो के रह गया,कैसे सपने देखे हमने केसे बन के रह गयाचम्मचों की फौज है नेताओं...
" एक दिल हूंद " दिल सब्यूं , भितर हूंद.दिली त हूंद , जो रूंद.दिल जड़द- पच्छ्यड़द-भितनैं रूंद , भैनैं...
भारत माता तेरे देश में किसान गरीब क्यों ?आज़ादी से पहले भी वो गरीब था आज भी ज्यों का त्योंदारू...
रोज जीवनम , नै अध्या जुड़द.रोज नैं- नैं , सिखड़ा कु मिलद.रोजा हिसाब- निसाब , रोज ह्वे-रोज ! हर रोजा...
मां जबसे इस शहर में आया हूँन ताजा पानी पिया हूँन ताजी सब्जी खाया हूँमा जबसे इस शहर में आया...
भात कोई आम अन्न नहीं है बल.. दिनभर में कितने पकवान खा लो भात नही खाया तो छपछपी नही पड़ती...
त्यार आला बार आला बार आला लोग अपना घर बार आलाघर तै भांति भांति का रंगू न सजालापर जु सहीद...
