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October 24, 2026

डॉ. महेंद्र पाल सिंह की गढ़वाली कविता, तै शहीद कि याद माँ

त्यार आला बार आला बार आला लोग अपना घर बार आला
घर तै भांति भांति का रंगू न सजाला
पर जु सहीद हवेगी लाम पर
देश का नाम पर
तै शहीद कि माँ
कै द्याली पैलि करछी खीर की ?
कै मुंग लगाली कथा तै अभागा बीर की ?
ओर छाती पर लगया तीर की
कु खेलालू कातिक कि बगवाल फागुण कि होली
आला जब भी येन त्योहार माँ तै की याद माँ रोली
भै-भैंण कु मिलणा कु आलू राखडी कु त्योहार
कै त बाटली भैंण भाई कु प्यार
कै का माथा पर लगाली चिरंजीव कु टीका
कै का कलाई माँ बांधली धागा कु बंधन
आला जब कोई मोका करली माँ व पत्नी रूदन
जै पिता न दिन रात आस करी पाली
आज याद मा पिटदू कपाली
खांद न पीन्दु, दिन रात रोन्दु
देख अनाथ नाती विधवा ब्वारी मूर्छित होन्दू
पुछ्दू कभी पिता का बारा मा अबोध नाती ओंदी वे कि याद पिट्दू व छाती
है शहीद तो मर कर भी अमर ह्वेगी
जब भी कभी इन आलू

महेन तेरी गाथा जरूर गालू

रचनाकार का परिचय

नाम -डॉ. महेंद्र पाल सिंह परमार ( महेन)
शिक्षा- एम0एससी, डीफिल (वनस्पति विज्ञान)
संप्रति-सहायक प्राध्यापक ( राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी)
पता- ग्राम गेंवला (बरसाली), पोस्ट-रतुरी सेरा, जिला –उत्तरकाशी-249193 (उत्तराखंड)
मेल –mahen2004@rediffmail.com
मोबाइल नंबर- 9412076138, 9997976402 ।

Bhanu Prakash

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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।