आदमी परेशान है। काग़ज़ों में अमीर है। आज भी जो फ़कीर है। खलिहान में न धान है। आज रहा न...
साहित्य जगत
मधुमास का आना हुआ। मौसम भी सुहाना हुआ। काला - कलुटा भंवरा भी कलियों का दीवाना हुआ। गुलशन का पत्ता...
उजियारे दिन, काले हो गए। मौसम, बादल वाले हो गए। दीयों का नहीं दोष ज़रा - सा तम के साथ...
मौसम की मार। ग़रीब लाचार। हर दिन पेट सहे भूख़ के वार। मांग जो लाए चार दिन उधार। राह में...
मैं ही मैं, मैं ही मैं सुबह - शाम, मैं ही मैं। मैं ही मैं, मैं ही मैं। जब भी...
गणतंत्र का पर्व गणतंत्र का शुभ दिवस आया। भारत मां का मन हरषाया। आसमान को छूए तिरंगा शीश गर्व से...
दिल में खोट है राम की सिर्फ़ ओट है। वरना दिल में खोट है। चरण उनके चूमेंगे जो भी उनके...
राम धाम जो आया है, जीवन सफल बनाया है। अवधपुरी में आया जो सरयू नद में नहाया जो। जीवन उसका...
भोर का शोर। मचा चहुं ओर। टूट अब गई नींद की डोर। कलरव का अब रहा ना दौर। ज़िंदगी चली...
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल से अंग्रेजी साहित्यकार केजी बहल ने मुलाकात कर उन्हें श्रीमद् भागवत की अंग्रेजी...
