ख़बरें खासकर वह बासी खबरें... बासी नहीं तिबासी खबरें... होती सब बकबासी खबरें... करती बहुत उदासी खबरें... लद गये दिन...
साहित्य जगत
वक्त क्या क्या सिखा देता है अरे वक्त तुम, क्या क्या सिखा देते हो। कभी हसातें तो, कभी रुला ही...
ताले की चाबी रक्खी है। कितनी खुशफहमी रक्खी है।। तुमने यारब मन में अपने। भर कितनी तल्खी रक्खी है।। अपना...
मातृभूमि के वीर जवान हे! मातृभूमि के वीर जवान, जज्बा इतना क्यों बड़ा है। वतन की खातिर ही तो आज,...
जरा संभल इंसान जरा संभल कर रह इंसान यहां, प्रकृति पर तेरा एहसान होगा। मत कर प्रकृति से छेड़छाड़ अब,...
मन की उलझनें जीवन की अनसुलझी उलझनें, क्यों आज मुझे उलझा रही हैं। निकलूं कैसे उलझनों के भंवर से, उलझनें...
ओ मेरे मीत ओ मेरे मीत! गाऊं मैं कैसे-कैसे तपती धूप के पसीने में उलझ जाते हैं मेरे गीत !!...
देश-दुनिया के प्रसिद्ध पत्रकार और साहित्यकार स्व. मोहन थपलियाल की साहित्यिक-यात्रा पर आनलाइन मंथन हुआ। उत्तराखंड की जिया पेज पर...
प्रेम का बीज बोकर तो देखो इस बंजर माटी में ए मानव तुम, प्रेम का बीज बोकर तो देखो। चारों...
जीवन झड़ पड़ता डाली से, मैं पतझड़ का पीला पात। इस जग में आया फिर मैं, लेकर फिर से नया...
