अस्तित्व पहाड़ का पानी यहां की जवानी अपने अस्तित्व को लेकर अभी भी तरस रही है क्योंकि- पहाड़ ने कभी...
साहित्य जगत
कब तक खुद को समझाएंगे। ऐसे तो हम मर जाएंगे।। झूठे ख्वाबों से यारो हम। यूं कब तक मन बहलाएंगे।।...
लग रहा बसंत सा लग रहा मृदुल बसंत सा, परिंदों का गुंजन मेरे वन में। दिशाएं सभी महक रही, कलियां...
दु-मुख्या वेन त बड़ै हमु- सबु, बरोबर इक-नसि यख. हमन बड़ै दे वेकि या, धरोहर कन-नसि यख.. क्वी बढ अगनै-क्वी...
पनघट (धारे) मुझको तो मेरे गांव के ही, पनघट (धारे) प्यारे लगते हैं। गर्मी वर्षा आंधी हो या तूफान, अविरल...
पुष्प कहे माली से पुष्प कहे माली सेआज, तेरा मेरा अंत नहीं। टूट भी जाऊं डाली से तो, मेरे जीवन...
सारू जन- लगल्यूं थैं रैंद सारू, झाऽड़ कू. उनि- पुगड़्यूं थैं रैंद सारू, बाऽड़ कू.. एक- हैंका सारू, हर -...
हे! माटी हम तेरी संतान बनें तन को पवित्र करने वाली हे! माटी, तुम हमारी माता,हम तुम्हारे पुत्र बनें। तेरे...
हमारु उत्तराखंड भारत माँ कु शीष हिमालय अखण्ड कतना प्यारू कतना स्वाणू हमारु उत्तराखंड गंगा यमुना कु उद्गम बद्री विशाल...
जीवन लीला मन्खी जून-दे प्रभु तिन, कनू- निरबळ बड़ाय. इनु जीवन थैं पैकि भी, स्वाचा हमन क्य पाय.. माँ न...
