दिल का पुर्जा पुर्जा पढ़ना। सहरा को अब दरिया पढ़ना।। दुनिया का जब नक्शा पढ़ना। अपना-अपना किस्सा पढ़ना।। खा सकता...
साहित्य जगत
देख रही है प्रिय धरा निरंतर ! फाख्ता गौरैया ग्लैडोलिया, गेंदा गुड़हल गुलदाऊदी। हरित क्षेत्र सम्मुख सुरपर्वत, पुष्प पर्ण सुरभित...
मैं सड़क हूं मैं सड़क हूं,कई बार बनती, कई बार टूटती। मैंने तुम्हें अपनों से जोड़ा, लेकिन क्यों लोगों ने,...
पथ पर चलता जा हे पथिक! तू निर्भय होकर पथ पर अपने बढ़ता चल। राहों में कर रहीं इन्तजार ठोकरें...
जाग जा हे! पथिक रात का घना अंधेरा, सुनसान सड़को पर राही गुम हो गए। जाग जा हे! पथिक, अब...
योग योग कि मैंमा, आज कैसे- कम नीच. आज- सबि करदीं योग, कै- छम नीच.. सरल- गरल, जो- जनु कै...
परिंदों का आशियाना मेरे मृदुल वन में जब, परिंदों की गुंजन होती है। हृदय खुश हो जाता तब, उनकी जब...
ल्याखा-पाढ़ा सुड़ीं-जड़ीं छ्वीं-बतौंम, द्वी-चार ह्वे जांद. गुणीं-लिखीं कितब्यूंम, नै बिचार ह्वे जांद.. धरोहर च हमरी, यीं बिट्वाऴा-समाऴा, नै- पुरणि कितब्यूं...
न निकले आंसू बेवजह आज दूरियां बनी है दिलों में, देख रहा मैं चारों ओर से। मैं तो बंधा रहूंगा...
ठक-ठकि कनि ठकठकि लगदि छै, तब गौं-मुल़क आंणा की. कनि मरमरि हुंदि छैं, ब्वे क हथा-रोटि खांणा की.. मैना भर...
