मैं टालता गया मैं टालता गया... जो अवसर आया... जो अवसर आया मैं टालता गया जो अवसर आया मैं टालता...
साहित्य जगत
नाटक सुन चेतुआ ना रार कर... नाटक ना बार बार कर... सुंदर शब्दों का संचय कर नित जीवन अपना उदय...
तलाश मैं न जाने क्यों खुशी की, तलाश में यूं ही भटकता रहा। कभी वो न मिली मुझे मैं उसकी...
कख हरचि आज हमारा पुराणा रीति रिवाज कख हरचि आज हमारा पुराणा साज बाज ब्यो बरात्युं म मांगळ नि सुणेन्दा...
हृदय में बह रही प्रेम की धारा आज न जानें मेरे हृदय में क्यों, बह रही प्रेम की रस धारा।...
सुन चेतुआ ओ चेतुआ... सुन चेतुआ, सुन सुनैतू गुन चेतुआ... सुन चेतुआ सुनिले बाबू, मुख मुखैको ज्ञान चेतुआ... देख चेतुआ...
उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में साहित्य जगत की सुरुचि संपन्न सकारात्मक अभिव्यक्ति की अर्द्ध वार्षिक पत्रिका चंद्रदीप्ति के...
ख़बरें खासकर वह बासी खबरें... बासी नहीं तिबासी खबरें... होती सब बकबासी खबरें... करती बहुत उदासी खबरें... लद गये दिन...
वक्त क्या क्या सिखा देता है अरे वक्त तुम, क्या क्या सिखा देते हो। कभी हसातें तो, कभी रुला ही...
ताले की चाबी रक्खी है। कितनी खुशफहमी रक्खी है।। तुमने यारब मन में अपने। भर कितनी तल्खी रक्खी है।। अपना...
