अशोक आनन की कविता- धुएं की चादर
धुएं की चादर ओढ़े
शहर पड़ा।
शहर की तबीयत
ठीक नहीं है।
सेहतमंद में
शरीक़ नहीं है।
प्रदूषण सूचकांक
आसमां चढ़ा।
शहर की सांसों में
ज़हर घुल गया।
बीमारियों का अब
द्वार खुल गया।
घर के द्वार पर
अब यमराज खड़ा। (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
आदमी, आदमी का
दुश्मन बना।
मौतों का तान दिया
साया घना।
आदमी नाहक ही
ज़िद्द पर अड़ा।
पेड़ काटकर
कांक्रीट को रोपा।
बच्चों को यही
नज़राना सौंपा।
भविष्य कैसे बचे
प्रश्न है बड़ा।
कवि का परिचय
अशोक आनन
जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com
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