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August 27, 2026

फास्ट फूड में उत्तराखंडी जायका, कपिल डोभाल की बूढ़ दादी में ऑर्गेनिक उत्पाद से निर्मित पकवान

अब फास्ट फूड में उत्तराखंडी जायके का तड़का लगाया गया है। बूढ़ दादी नाम से खुले रेस्टोरेंट में शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद से निर्मित उत्तराखंडी पकवान परोसे जाएंगे। इसकी शुरूआत भी हो गई है।

अब फास्ट फूड में उत्तराखंडी जायके का तड़का लगाया गया है। बूढ़ दादी नाम से खुले रेस्टोरेंट में शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद से निर्मित उत्तराखंडी पकवान परोसे जाएंगे। इसकी शुरूआत भी हो गई है। बढ़ते वैश्वीकरण के दौर में जहां आम आदमी व्यस्तता के दौर से गुजर रहा है, वहीं उसके खानपान में भी बदलाव आया है। ऐसे में युवाओं का रुझान फास्ट फूड व स्ट्रीट फूड की तरफ बड़ा है। इस सबको मध्य नजर रखते हुए चकबंदी आंदोलन की तेजी देने वाले कपिल डोभाल ने एक नई सोच विकसित करते हुए गढ़वाली व्यंजनों को स्ट्रीट फूड जैसे मोमो, चाउमीन, थुप्पा इत्यादि का तोड़ निकालते हुए शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद से निर्मित फास्ट फूड विकसित किया है। कपिल डोभाल बताते हैं कि उनकी पत्नी श्रीमती दीपिका डोभाल ने हमारे कई लुप्त हो रहे पकवानों को नए तरीके से परोसते हुए कोशिश की है कि गढ़वाली व्यंजनों को 21वीं सदी का ट्रेडिशनल हेल्थी स्ट्रीट फूड के रूप में लोगों की चॉइस बनाकर पेश किया जाय।
हरिद्वार रोड जोगीवाला में गोविंद होस्पिटल के निकट आज उनके इस स्ट्रीट फूड जंक्शन “बूढ़ दादी” का क्षेत्रीय विधायक उमेश शर्मा काउ व उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने लोकार्पण किया। विधायक उमेश शर्मा ‘काउ’ ने कहा कि यह वर्तमान की मांग को देखकर बहुत सुंदर पहल कही जा सकती है। क्योंकि युवाओं की दिलचस्पी फास्ट फूड के प्रति होने व उसके प्रजेंटेशन के तरीके में ज्यादा दिखती है। ऐसे में कपिल डोभाल व उनकी पत्नी द्वारा गढ़वाली पकवानों को नए तरीके से प्रस्तुत कर स्ट्रीट फूड के प्रति नया रुझान पैदा किया है।

राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने कहा कि यह पहला व अनूठा प्रयोग है। इससे राज्यीय अन्न उत्पादकों में भी रुझान बढ़ेगा क्योंकि यह ठेठ पहाड़ के ऑर्गेनिक उत्पादों से निर्मित पकवान हैं जो आज तक बाजार में कभी दिखने को नहीं मिले। ये स्वाद में भी लजीज हैं व दिखने में भी बेहद सुंदर। कपिल डोभाल व श्रीमती दीपिका डोभाल को शुभकामनाएं। इस दौरान समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे उदित घिल्डियाल ने कहा कि हमें कपिल डोभाल के इस प्रयास की सराहना ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि हम सबको इसे प्रमोट भी करना चाहिए। ऑर्गेनिक उत्पादों से निर्मित ये स्ट्रीट फूड स्वास्थ्य के हिसाब से भी सभी फास्ट फूडों में बेहतर हैं। क्योंकि इसमें मैदा नहीं, बल्कि ठेठ पहाड़ी उत्पाद जिनमें मंडुवा, गैथ, झंगोरा, विभिन्न पहाड़ी चावल, उड़द, राजमा, भट्ट, तोर, रयांस, आलू, भंगजीरा, सहित 52 तरह के अन्न इस्तेमाल में लाएं गए हैंष जिनसे दो दर्जन से अधिक पकवान बनाये गए हैं।
“बूढ़ी दादी” स्ट्रीट फूड जंक्शन के लोकार्पण के दौरान विभिन्न पकवान जिनमें ढुंगला, ढिंढका, गिंवली, जवलि, घीन्जा, सिडकु, बेडु रोटी, सोना आलू, करकरा पैतुड़, द्युडा, बदलपुर की बिरंजी, बडील, ल्याटू, पतुड़ी, टपटपि चा, पिट्ठलू, चर्चरी बर्बरी चटनी, बारहनाजा खाजा, चुनालि, घुमका व मुंगरेडी इत्यादि डिसप्ले में लगाये गए हैं। इस दौरण कृषि विभाग से विनोद कुमार धस्माना, रोहित नेगी, रीतू सजवाण, पूर्व प्रमुख विकास खण्ड पोखड़ा इत्यादि मौजूद थे।