ललित मोहन गहतोड़ी के दो कुमाऊंनी गीत, शप्थ मार और घर घर
शप्थ
चोट चड़ी चटक मार
मौक मिलै फटक मार
हटत छोड़ि झटक मार
गमका आंसू गटक मार
शान शौकत ठस्क मार
प्यार वफा फस्क मार
काम चलन जस्क मार
अंगूठा कि घस्क मार
दौड़ि दौड़ि लस्क मार
न तू मंतर मस्क मार (जारी, अगले पैरे में देखिए)
मुख नै दिनै ठस्क मार
हथौड़ सुनै जस्क मार
फाम उनै डिप्स मार
निसान कति फिक्स मार
घाम लगन चट्क मार
हिटन बाटै गप ले मार
सब कुछ भले करिले भुला
कभै लै बात बात में
आपना कि न शप्थ मार (जारी, अगले पैरे में देखिए)
घर घर…
आ रही कलयुग की बहार
घर घर लड़ रहा बेटा यार…
आ रही कलयुग…
पिता के आगे तन रहा बेटा
मां पर पत्नी भारी
पत्नी सामने बने बेचारा
भीगी बिल्ली खिसयारी …
आ रही कलयुग… (जारी, अगले पैरे में देखिए)
सगे संबधी दूरी कर रहे
दूर हो रही यारी
प्यारी प्यारी कह कर बेटा
सिर बैठा ली बीमारी…
आ रही कलयुग….
शरम धरम सब छोड़ छाड़ कर
कर रहा वारी न्यारी
आंचल पीछे है छुप जावे
कर हर गलती भारी…
आ रही कलयुग…
फिर पछतावा होना है क्या
देखी दुनिया सारी
समय के रहते चेत ले बेटा
फंदे पड़ते भारी…
आ रही कलयुग…
रचनाकार का परिचय
रचनाकार ललित मोहन गहतोड़ी काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
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Bhanu Bangwal
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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


