ललित मोहन गहतोड़ी के दो कुमाऊंनी गीत
ठगो नहीं…
अच्हारे हर एक बेवस को।। टेक।।
ठगो नहीं रे ठगव्वा लोग… हर एक बेवस को
सबको ठग ठग तुम खुश हो रहे।। 2।।
ठगनी पड़ती भारी….
हर एक बेवस को…
ठगो नहीं…
बेवस नैना गिरते जो आंसू।। 2।।
हर आसूं अनमोल…
हर एक बेवस को… ठगो नहीं… (जारी, अगले पैरे में देखिए)
तुम तो रंग महल में रहते।। 2।।
वह बेवस लाचार.. हर एक बेवस को… ठगो नहीं…
करनी धरनी साथ है चलती।। 2।।
कलयुग करनी जोर … हर एक बेवस को… ठगो नहीं…
आज की जान दे कल की जान ले।। 2।।
मत अजमा तन जोर.. हर एक बेवस को… ठगो नहीं… (जारी, अगले पैरे में देखिए)
पहाड़ी गीत– ओ साली…
ओ साली रंगिलि साली
हिट कौतिक घुमि आली
देवता रथ दर्शन करली
भल भल वर दान पाली
ओ साली रंगिलि…
मेला में घुमुन त्वै खन
चरखा ले बैठुन त्वै खन
सर्कस देखुला आजि
चाकलेट खवुन त्वै खन
मिठाई दुकान में साली
मिठी मिठी जलेबी खाली
ओ साली रंगिलि… (जारी, अगले पैरे में देखिए)
लुघाट बजार में साली
आलु चना मटर खाली
दाल भात नि खाली भांगि
ताजा फ्रूट फल खाली
कालि कुमाउकि पहचान का
पहाड़ि स्वादि केला खाली
ओ साली रंगिलि…
मेला में दुकान सजी छन
गौ घरों का लोग पुजि छन
फैशन बहार छानि बानि
लुड मुंडा की शान बड़ि छन
मेला कौतिक घुमलि साली
मन भितर उमंग जागली
ओ साली रंगिलि…
रचनाकार का परिचय
रचनाकार ललित मोहन गहतोड़ी काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
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Bhanu Bangwal
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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


