नए कलेवर में वह प्रत्येक अंधकार से लड़ा है और वर्षों से निर्विकार खड़ा है उमस, तपन, धुप, बरखा, सर्द...
Literature
रे मन मूरख काहे भरमाए तू। हरि चरनन् चित्त, काहे न लाए तू॥ भव सागर गहरा अति दुस्तर। सौंप प्रभु...
गढ़वाल भवन नई दिल्ली में उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वाधान में वरिष्ठ साहित्यकार जगमोहन सिंह रावत जगमोरा...
जो नारी का सम्मान न करे वो नर, नारी विहीन रहे न कोई कहे पति उसे न कोई पुत्र कहे...
लाल हरे, पीले, नीले गैस से भरे गुब्बारे। भला किसे अच्छे नहीं लगते। बच्चे इन गुब्बारों को पाने के लिए...
तुम्हारी याद में आई आज हमारे घर में, एक नन्ही सी मेहमान थी, काले,लम्बे बाल घनेरे, ऑंखें झील सी गहरी...
मिलकर दिन को रात करें, बैठ, आ मन की बात करें। वो धर्म से धर्म को जोडे़ं गर, हम धर्म...
देखा मैंने आज एक बूढ़ी मां को, सिर पर लकड़ियों का गट्ठर लिए हुए। भरी दोपहर में पसीने से तर-बतर,...
काठ के हिरण यहां नचा रहा है वो, कैसे-कैसे सपने दिखा रहा है वो। केंचुली बदल-बदल के थक नहीं रहा,...
आज सुबह से एक बात मेरे मन को कचोट रही थी आज रविवार था पर हल्का सा मुझे बुखार था...
