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June 27, 2026

आज आपातकाल का रोना रोने वाले बताएं बाला साहब देवरस ने क्यों किया था आपातकाल का समर्थनः सूर्यकांत धस्माना

एक राजनैतिक घटनाक्रम “आपातकाल” तत्कालीन समय 1975 से 1977 तक विशिष्ट परिस्थितियों के कारण घटित हुआ था। उसका रोना रोने से राम मंदिर में चोरी, नोटबंदी व जीएसटी से तबाह हुई अर्थव्यवस्था, गुजरात दंगे, पुलवामा, पठानकोट, उड़ी व पहलगाम में आतंकी हमले समेत मणिपुर में नरसंहार को भूलाया नहीं जा सकता है। आपातकाल का रोना रोने से भाजपा नेताओं द्वारा महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ के पाप धुलने वाले नहीं। यह बात एआईसीसी सदस्य व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आपातकाल पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के कांग्रेस की नेत्री लौह महिला दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर जड़े गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि शायद भाजपाइयों को यह जरा भी इलम नहीं, या उन्होंने इतिहास नहीं पढ़ा कि आपातकाल के दौरान जेल में बंद तत्कालीन आरएसएस के सर संघचालक बालासाहेब देवरस ने इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने आरएसएस कार्यकर्ताओं की रिहाई के एवज में आपातकाल का समर्थन करने का प्रस्ताव दिया था। साथ ही उच्चतम न्यायालय से इंदिरा जी का चुनाव वैद्य ठहराने के लिए उनको बधाई दी थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस नेता धस्माना ने कहा कि बालासाहेब देवरस ने तो यहां तक लिखा कि आरएसएस का जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है। इस पर भाजपा नेताओं को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1977 में इंदिरा जी ने ही आपातकाल खत्म कर देश में आम चुनाव करवाए। पराजित होने पर स्वयं सत्ता की चाबी जनता पार्टी को सौंप दी। ढाई साल में ही आपस में लड़ कर ये पार्टी निपट गई। और देश की जनता ने इंदिरा जी को मात्र ढाई साल में ही आपातकाल के लिए माफ़ कर देश की सत्ता सौंप दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

धस्माना ने कहा कि इंदिरा गांधी जैसी साहसी नेता ने ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे। दुश्मन देश के 98 हजार सैनिकों को घुटनों के बल बैठा कर आत्मसमर्पण करवा दिया। उनकी निंदा करना आसान है, किन्तु उनके आस पास तक पहुंचना बहुत कठिन है। वहीं, अंग्रेजों से माफी मांगने वाले दस बार के माफीवीर के चेले आपातकाल के दौरान भी घुटनों पर बैठ कर गिड़गिड़ाने लगते हैं।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।