नौ दिसंबर 2020 को लोकसाक्ष्य के माध्यम से युवा लेखिका एवं कवयित्री किरन पुरोहित ने अलकनंदा नदी को पत्र लिखा...
साहित्य
कैसे गद्दारों और मक्कारों की कामयाब ये चाल हुई। बही थी नदिया शोणितों की और धरा भी लाल हुई। क्षत...
हिन्दी राष्ट्रवाद के हर पन्ने पर, हिन्दी का साम्राज्य हो । भटक रही पहचान हमारी, उठो उसका सम्मान हो ।।...
तपोवन की व्यथा जिन बर्फ की चोटियों का दीदार करने, सैलानी आते थे यहाँ सैर करने। डर रहे हैं काँप...
क्यों राष्ट्र के भक्षक-रक्षक से पराक्रम का प्रमाण माँगते हैं, संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की सारी सीमायें लाँघते हैं।। जला रहे...
अगर कभी-भी नहीं मिले तो अगर कभी कुछ कहा नहीं तो - बात कैसे है ? अगर कभी कुछ सुना...
मौ बीतीगे फागुण लैगे, बीटा पाख्यूं मा फ्यूँली खिलीगे। ऊँची डाण्डियों मा बुराँश खिलीगे, पञ्चमी कू ऐगि त्योहार, दगड़्यों फागुण...
हर व्यक्ति की पहचान अलग-अलग तरीके से होती है। किसी की पहचान में व्यक्ति की खुद की आदत, स्वभाव या...
कह रहा हिमालय अब भी समय है कह रहा हिमालय अब भी समय है, जागो - जागो देर न हो...
कोई काम देखने से काफी आसान लगता है, लेकिन जब करने बैठो तब ही उसकी अहमियत नजर आती है। आसान...
