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October 17, 2026

साहित्य

ब्यटलौं क भोऽर चल़णू , हमरु घर- संसार च. ब्यटलौं मीलु ऊं कु अधिकार, आज दरकार च.. ब्यटलौं न दे-लाड-प्यार,...

नारी है परी-जैसी, स्त्री प्रेम की धारा है। सेहरा-से जीवन में, नारी ही सहारा है।। आलम में अँधेरा है, भटकाव...

पहाड़ी गीतमाला फाल्गुनी फुहार को लोकगीतों का संग्रह भी कहा जा सकता है। इनमें कुछ गीत को लेखक की ओर...

मेरे डांडो - कांठों में आजकल सुरभित पुष्प खिले हैं। बांज बुरांश मौरू तरुवर, शांत स्निग्ध हरितपर्ण धरे हैं। प्रिय...

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में काली कुमाऊं के पाटी विकासखंड में एक अनोखी पारंपरिक प्रथा बेट अभी भी कायम है।...