Recent Posts

Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Recent Posts

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

June 27, 2026

शिक्षक माधव सिंह नेगी की गढ़वाली कविता-मौ बीतीगे फागुण लैगे

शिक्षक माधव सिंह नेगी की गढ़वाली कविता-मौ बीतीगे फागुण लैगे। कवि रुद्रप्रयाग में सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापक हैं। साथ ही साहित्य के क्षेत्र में वह निरंतर लिखते हैं, साथ ही अन्य शिक्षक और छात्रों को लिखने के लिए प्रेरित करते हैं।

मौ बीतीगे फागुण लैगे,
बीटा पाख्यूं मा फ्यूँली खिलीगे।
ऊँची डाण्डियों मा बुराँश खिलीगे,
पञ्चमी कू ऐगि त्योहार, दगड़्यों फागुण लैगे।।

गेहूँ की सारियों मा घर्रया फूलीगे,
डाळी डालियों मा मोल्यार ऐगि।
छैगे बसन्त बहार,
दगड़ियों फागुण लैगै।।

घुघुति, मेलुड़ी बासण लैगी,
डांडियों, काण्ठियों कू ह्यूं गौलीगे।
आड़ू, क्वीर्याळ फूलण लैगी ,
जिकुडि़यों मा ऐगि उलार,
दगड़ियों फाल्गुन ऐगि।।

फागुण शिवरात्रि नजदीक ऐगि,
तेड़ु, पिनाळु, की मजा पड़ीगे।
लैंय्या, भंगुळे की बार ऐगि,
घनौळियौं कू ऐगि त्योहार,
दगड़ियों फागुण लैगै।

बाणि कमौणी की शुरुआत ह्नेगि,
आड़ा क्येड़ों कू निचन्त ह्नेगि।
पैरा- पगार चिड़्यैण लैग्यां,
पुगणियों मा लैगिगे धाण,
दगड़ियों फागुण लैगै।।

कवि का परिचय
नाम- माधव सिंह नेगी
प्रधानाध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैली
ब्लॉक जखोली, रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

You may have missed