क्या हम स्कूल जा पाएंगे सोचा न था जीवन में, ऐसे दिन भी आयेंगे। कारण कोरोना के हम, घर पर...
साहित्य
श्रृंगार की बेड़ियाँ आभूषण, बनाव, श्रृंगार, सौंदर्य की बेड़ियों में जकड़ी करती मिथ्या परम्परा में विहार स्त्री! क्या तुम्हें दुःख...
कुल्हड़ की चाय की चुस्कियां माटी से जुड़ा रखती है। दुनिया के बदलते तौर तरीकों में भी उस कुम्हार की...
कनु-बिज़ोग कख- कख बटि कख- तक लेखण, स्वाचा. बनि- बनी दुन्या कख- तक देखण, स्वाचा.. ब्वना कु मन्खी-दूर तक पौंछ,...
प्रेम मेरा प्रेम संगीत मंदिरों में गुंजते पवित्र मंत्रोचारण और घण्टियों की ध्वनियों के साथ हर दिशाओं में गुंज रही...
पत्थर की अभिलाषा चाह नहीं नव निर्माण के.. शिलान्यास में रखा जाऊं! चाह नहीं देवालय में रख कर.. हरि संग...
गूँज उठी रणभेरी काशी कब से खड़ी पुकार रही पत्रकार निज कर में कलम पकड़ो गंगा की आवाज़ हुई स्वच्छ...
इंसान क्यों डरा डरा सा क्यों वीरान सी लगती ये धरती, लगता शहर भी सुनसान सा। यही लगता खुदा नाराज...
हे प्रभु तू ही तू मन्खी ज्यूम - कन रिटदी, कतगै बानी - गाणि. बिधातन भागम क्या लिख, कैना कुछ...
हां हूं मैं मॉडर्न खयालो की पर जानती हूं मैं संस्कार भी, हां हूं मैं खुले विचारों वाली पर जानती...
