माँ का दिल दुख बेटे का देख पिघलता क्यूँ है। देखकर चोट वो मरहम उसे मलता क्यूँ है।। होती है...
साहित्य
मुसहरिन माँ धूप में सूप से धूल फटकारती मुसहरिन माँ को देखते महसूस किया है भूख की भयानक पीड़ा और...
हम पर तरस क्यों नहीं आता मम्मी पापा चाची चाचा, हम पर तरस क्यों नहीं आता। बिना पढ़ाई के घर...
थ्रेसर थ्रेसर में कटा मजदूर का दायाँ हाथ देखकर ट्रैक्टर का मालिक मौन है और अन्यात्मा दुखी उसके साथियों की...
कुछ सोच ज़रा देखो, लालच तो बुराई है। लालच ने हँसी जग की, दिन रात चुराई है।। की तुमने जमाखोरी,...
दग्ड्यों तुम्हरी मुखड़ी मेरी इमिन्युटी बढांद तुम्हरी जिकुड़ी मेरी एंटीबाडी जमांद तुम्हरो हैंसणों मेरी वैक्सीन छ तुम्हरो ब्वन बच्याणो मेरी...
साहित्य और सत्ता साहित्य का सत्य और निश्छल शब्द सता के गलियारे में, जब दस्तक देता है, न... सिंहासन के...
उठा-पोड़ सरा राती- उठा-पोड़ म, जरा बि निंद नि ऐ. ज्यू-ज्यान बचांणां-दौड़ म, जरा बि निंद नि ऐ.. यो क्यांकु...
जोंक रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान, तब रक्त चूसते हैं जोंक! चूहे फसल नहीं चरते फसल चरते हैं साँड...
आश को उमाळ छ। फिर ऐगी सू कोरोना, तेज तैकी चाल छ। फिर घरों म कैद दुनिया,दुखी छ बेहाल छ।...
