'अनुप्रास अलंकार' में : 'म' से 'माँ' माँ मैं मुख मन्थन मधु! मधुर मंगल मृदुल माँ! महान महन्त मातृत्व महिमा!...
साहित्य
तुम आत्महत्या करोगे संकट गहरा रहा है दुराकाश में हिंसक पक्षियों का दल आ रहा है क्षितिज पर षड्यंत्र का...
चिहुँकती चिट्ठी बर्फ का कोहरिया साड़ी ठंड का देह ढंक लहरा रही है लहरों-सी स्मृतियों के डार पर हिमालय की...
वक्त गुजर जाएगा आज जो गुजर रहा तेरे सामने कल हो जाएगा होंसलों में फूंक भर मुमकिन है संवर जाएगा...
न छौंका मारा दैं न तुक्का मारा दै अपणो का खातिर एक पहल करा धै न कैसी डरा धै न...
स्मृतियाँ स्मृतियों के पटल पर उग आए हैं, वर्तमान की चहकती इच्छाओं के गाछ अंकित हो गए हैं स्वप्निल इबारतें...
उम्मीद की उपज उठो वत्स! भोर से ही जिंदगी का बोझ ढोना किसान होने की पहली शर्त है धान उगा...
माँ का दिल दुख बेटे का देख पिघलता क्यूँ है। देखकर चोट वो मरहम उसे मलता क्यूँ है।। होती है...
मुसहरिन माँ धूप में सूप से धूल फटकारती मुसहरिन माँ को देखते महसूस किया है भूख की भयानक पीड़ा और...
हम पर तरस क्यों नहीं आता मम्मी पापा चाची चाचा, हम पर तरस क्यों नहीं आता। बिना पढ़ाई के घर...
