एक बार तुम फिर से जागो, प्रेम की गंगा पुनः बहाओ, दूसरों के लिये रोड़े न बनो, सत्य और नीति...
साहित्य
रिमझिम बरसो बरखा रानी मौसम कितना सुहावना है सावन जैसा ही लगता है रिमझिम -रिमझिम पानी बरसे छायी बदरिया है...
बांध दिए क्यों प्राण प्राणों से! याद दिलाती ये पंक्तियां मुझे। अब यह मर्म कथा,बढ़ती विरह व्यथा, पन्त जी की...
मत देना वरदान मुझे मैं रोऊँगा, चिल्लाऊंगा निज किस्मत को गोहराउंगा, संतप्त वेदना में तपकर अपना संघर्ष लुटाऊँगा। पग-पग पर...
हे मां सरस्वती कृपा करो हे मां सरस्वती हम पर कृपा करो, अन्दर ऐसा प्रेम जगाओ, जन जन का उपकार...
हे ! बद्रीश प्रभु कृपा करो हे देव-मनुजों के पति लक्ष्मीपति, बद्रीवन के विशाल श्रीबद्रीश जी , सृष्टि पालनहार पीताम्बरधरा...
भोलेनाथ तुम दया निधान आशुतोष तुम संकट हारी, दया करो हे कृपा निधान। भव भय भंजन सुख के धाम, हे...
घोऽर कऴजुग काम- काज करि, थकदि छै- देऽ- कै बगत. वर्डसप चलै-चलै, थकि जांणू गात-ये बगत.. सवेरा दिन- दिना ब्यखुन्या,...
बडे़ बाबू वैसे तो उनका नाम राम स्वरूप सक्सेना था, परंतु उनके ओहदे और बुजुर्गियत को देखते हए सभी लोग...
भारि सगत ......नखरु बगत..... कोरोना कनि या मो मार कार आज उजाडी दी घर बार आज काम व्योपार खै गे...
