मृत्यु का यह मुख्यद्वार मुबारक यह चुनावी त्योहार मुबारक। यह ज़हरीली फुहार मुबारक मेरी इक इक साँसो का होता। तुमको...
साहित्य
दिन कर गये कविता से राम को धारण कर मन में, दिन कर गये कविता से। अर किरणों को बना...
पॉड़ि-पॉड़ि अबि त-कड़क रूड़ नि पड़ि, गौंम सूख पड़िगे. मौल्यार बगत-अबि बटि, निचट रूख पड़िगे.. गौं का स्वाता- पंदेरा ,...
महाकाल कोरोना आया, सर पर मंडराया मौत का साया ! सवा तीन लाख आज संक्रमित, समय नहीं होने का भ्रमित।...
बाहर कोरोना कातिल खड़ा है वजह क्या है, बाहर निकलने की, विक्षिप्त कातिल बाहर खड़ा है। जरूरत क्या,कातिल से मिलने...
काली चादर उर में न जानें आज, छाया क्यों। तम जैसे काली चादर ओढ़े। दिशा दिशा बिखरी है क्यों, तम...
बचपना दिन छोटमा दिन बि, कन- दिन छा. अकल-सकल, का ही- बिन छा.. लाड- प्यार भी, करदा छा पर- उटकरमौं...
जिंदगी वतन के नाम क्या है इंसान बता, तेरी ये जिंदगी, जो काम ना आए वतन के। मौके तो बहुत...
नौ दिसंबर 2020 को लोकसाक्ष्य के माध्यम से युवा लेखिका एवं कवयित्री किरन पुरोहित ने अलकनंदा नदी को पत्र लिखा...
सात फेरा शादि- ब्योम , पौंणा खुज्यांणा हुयां छीं. चलि ल्यावा शादिम, मनांणा हुयां छीं.. ठकठ्याट रैंदु छौ, ब्यो- काज...
