हां हूं मैं मॉडर्न खयालो की पर जानती हूं मैं संस्कार भी, हां हूं मैं खुले विचारों वाली पर जानती...
कविता
छाले बेरोजगारी के हे पथिक! मत कर छालों की परवाह, आगे सफलता की मंजिल खड़ी है। दौड़ता जा कांटों भरी...
मैं आज भी जीवित हूं तो प्रभु तेरा ही रचा ये खेल है वरना कहां मैंने भरी आज तक इतनी...
एक छोटा सा शब्द जिसमे मेरी जान बसती है, रोते हुए भी मेने मुकुराया हे जब मेरी माँ हंसती है...
वेदना मेरे मन की एक वेदना है मेरे मन में, पुछूं तो पूछूं किससे। कौन कोरोना का हल्ला मचा रहा...
वो लड़का साहब, वो बाहर से मुस्कुराता है, वो खुश भी है, पर न जाने क्यों, उस मुस्कुराहट के पीछे...
वाह ! भाई कोरोना। तू आ गया ! हम सदा ही जमीन पर भार रहे। जिंदा लाश का भार ढोते...
मृत्यु का यह मुख्यद्वार मुबारक यह चुनावी त्योहार मुबारक। यह ज़हरीली फुहार मुबारक मेरी इक इक साँसो का होता। तुमको...
महाकाल कोरोना आया, सर पर मंडराया मौत का साया ! सवा तीन लाख आज संक्रमित, समय नहीं होने का भ्रमित।...
बाहर कोरोना कातिल खड़ा है वजह क्या है, बाहर निकलने की, विक्षिप्त कातिल बाहर खड़ा है। जरूरत क्या,कातिल से मिलने...
