घटाओं की छलक पड़ी सुराही। धरती की सूखी चुनरी भींगी। वेणियों ने खुल पत्तियां सींची। पनघटों पर मची आवाजाही। बूंदों...
साहित्य
मन बहुत बैचैन है कुछ ऐसा ढूँढ रहा है जो खो गया है खोया क्या है ये मालूम नही जीवन...
देश-विदेश में रह रहे 142 छंद साधकों ने भारतीय संविधान के मूल रूप को 26 प्रकार के छंदों में भारत...
ओ गुजरा हुआ जमाना आज, मुझे बहुत याद आ रहा है। बिछड़े हैं जो अपने मुझसे, ओ दौर याद आ...
यादों में चलती साइकिल 43 लेखकों के संस्मरण का ऐसा खूबसूरत गुलदस्ता बन गया कि यदि कोई किताब का पहला...
अंतर्राष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच तंज़निया की संस्थापिका डॉ. ममता सैनी के निर्देशन में रचित दो ग्रंथ की लोपार्पण समारोह दिल्ली...
कभी तो ऐसी बात हो। रोटियों की बरसात हो। दिन में गुलाबी धूप हो, दीयों भरी अब रात हो। ग़रीब...
खुशियों से कभी झोली भर दे इतनी जो संभाले नहीं संभलती हैं। पलभर में छीन खुशियों को, दुःखों के समन्दर...
एक पल, एक क्षण, कभी कभी सब कुछ बदल देता है, जीवन भर की खुशियों को क्षण भर में चूर...
प्रभु कैसे तेरा आभार जताऊँ। बस संग तुम्हारो नीको लागे, जगत ये तुम बिन फीको लागे। तुमसे दूरी पर कैसे...
