Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

October 22, 2026

अशोक आनन का गीत – छलक पड़ी सुराही

घटाओं की
छलक पड़ी सुराही।
धरती की
सूखी चुनरी भींगी।
वेणियों ने खुल
पत्तियां सींची।
पनघटों पर
मची आवाजाही।
बूंदों की
छम-छम खनकी पायल।
दामिनी
अंतर को करें घायल।
अनवरत बरस
मचाई तबाही। (जारी, अगले पैरे में देखिए)

नदियों के
मुंह में पानी आया।
ताल- कुओं का भी
मन ललचाया।
पावस
सूखे की न दे गवाही।
नाव में घूमे
गांव – शहर – गली।
घरों में घुस गई
बाढ़ मनचली।
ख़त्म हुई न
मेघ – तानाशाही।
कवि का परिचय
अशोक आनन
जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com

नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *