ललित मोहन गहतोड़ी का गीत-हो बीवी मायके गयी है आज
बीवी मायके गयी है आज
हो बीवी मायके गयी है आज।
सुनो जी मायके गयी है आज।।
सच कहता हूं झूठी बात नहीं,
किस्मत चमकी आज।
पैर पसार के बिस्तर पड़ा पड़ा,
खूब आ रहा नाच।।
हो बीवी मायके…
सुनो जी मायके…
नाक में गुस्सा हाथ मोबाइल,
ढेरों सवाल जवाब।
चैन वैन मेरा छीन के देखो,
खुश लगती बेहिसाब।।
हो बीवी मायके…
सुनो जी मायके…
धैर्यवान मैं सुन सुन करके,
रोज ही एक सी बात।
समय समय पूछती मुझसे,
कहां हो कहां जनाब।।
हो बीवी मायके…
सुनो जी मायके…
चारों पहर है शांत आजकल,
घर पर अपना राज।
कल परसों नहीं आएगी तरसों,
तब तक मैं लाट साप।।
हो बीवी मायके…
सुनो जी मायके…
चलेगा अब ना जोर किसी का,
ना सुनूंगा किसी की बात।
चैन की बंशी बजेगी चार दिन,
मौज करूंगा यारों साथ।।
हो बीवी मायके…
सुनो जी मायके…
रचनाकार का परिचय
रचनाकार ललित मोहन गहतोड़ी काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं। उनका कहना है कि जल्द वह फल्गुनी फुहारें का पांचवां विशेषांक प्रकशित करने जा रहे हैं इसमें पिछले सौ वर्ष पूर्व की रचनाकारों की हस्तलिखित पुस्तक के कुछ विशेष रचनाओं का भी प्रकाशन किया जाएगा।



