Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

October 28, 2026

पढ़िए पिता और माता पर लिखी गई युवा कवयित्री की सुंदर रचनाएं

पापा
मैं जानती हूं तुम भूखे हो
फिर क्यों तुम खुद को भूखे नहीं बताते हो
तपती धूप में पसीने से नहाकर
क्यों तुम खुद को इतना तड़पाते हो
आसानी से गमों को छुपाकर
पापा तुम कैसे मुस्कुराते हो ..?
खुद कांटो पर चलकर हमें गोद में उठाते हो
बच्चों के साथ बच्चा बनकर पापा तुम कितना प्यार जताते हो,
खुद की ख्वाहिशों पर कफन ओढ़ कर
तुम सबकी ख्वाहिशें पूरी कर जाते हो
इतनी जिम्मेदारियां उठाने के बाद भी
पापा तुम कैसे मुस्कुराते हो ..?
हर रोज़ सूरज की तरह सुबह उठकर
चले जाते हो काम पर
सबकी परवरिश की खातिर तुम
खुद रूखी सूखी रोटी चबाते हो
सर पर इतना भार लेकर भी
पापा तुम कैसे मुस्कुराते हो ..?
मां
मुझे ना हो पसंद, मैं वो भी कर जाऊंगी
मां मैं तेरे खातिर खुद से भी लड़ जाऊंगी

इस मतलबी दुनियां में तेरा प्यार मैं भूल ना पाऊंगी

तुमने क्या नहीं किया है मेरे खातिर
इसका कर्ज तो मैं मरते दम तक ना चुका पाऊंगी

चंद ही शब्दों में तारीफ हो जाय तेरी ऐसा हूनुर तो मुझमें आज तक ना आया
मैं क्या लिखूं तुझ पर तूने ही तो मुझे सबसे पहले लिखना सिखाया ।

कवयित्री का परिचय
नाम – गीता मैन्दुली
अध्ययनरत – विश्वविद्यालय गोपेश्वर चमोली
निवासी – विकासखंड घाट, जिला चमोली, उत्तराखंड।

Bhanu Prakash

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।