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July 12, 2026

राफेल सौदाः जब घोटाला कांग्रेस के समय हुआ तो जांच के नाम से क्यों डर रही बीजेपी, सौदे के खुलासे में नएअपडेट

राफेल विमान सौदे का जिन्न एक बार फिर से बोतल से बाहर निकल गया है। अब भारत की जांच एजेंसियों पर ही सवाल उठ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन एजेंसियों को सबकुछ पहले ही पता चल गया था, लेकिन जांच की जरूरत महसूस नहीं हुई।

राफेल विमान सौदे का जिन्न एक बार फिर से बोतल से बाहर निकल गया है। अब भारत की जांच एजेंसियों पर ही सवाल उठ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन एजेंसियों को सबकुछ पहले ही पता चल गया था, लेकिन जांच की जरूरत महसूस नहीं हुई। वहीं, कांग्रेस अब इस मामले में और अधिक हमलावर हो गई। साथ ही बीजेपी भी पलटवार करने में देरी नहीं लगा रही है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस इस मामले में देश की जनता को गुमराह करती रही है, जबकि उसके ही कार्यकाल में सबकुछ हुआ।
राफेल सौदे को लेकर छिड़े सियासी विवाद के बीच एनडीटीवी ( NDTV) ने भी इस मामले में कुछ और सबूत मिलने का दावा किया। दावा किया गया है कि भारतीय जाांच एजेंसियों ने इन आरोपों की अनदेखी की कि राफेल जेट फाइटर की निर्माता फ्रेंच कंपनी दसॉ ने बीजेपी नीत एनडीए 1.0 और कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान बिचौलियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया होगा।
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही फ्रेंच पोर्टल ‘Mediapart’ की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि फ्रेंच विमान निर्माता कंपनी दसॉ (Dassault) ने भारत को 36 राफेल फाइटर जेट बेचने का सौदा हासिल करने के लिए मिडिलमैन (बिचौलिये) सुशेन गुप्‍ता को करीब 13 मिलियन यूरो (आज की दर से लगभग 110 करोड़ रुपये ) का भुगतान किया और भारतीय एजेंसियां, दस्‍तावेज होने के बावजूद इसकी जांच करने में नाकाम रहीं।
दावा किया गया है कि इस मामले में कुछ और ऐसे दस्‍तावेज मिले है जो बताते हैं कि वर्ष 2019 में, भारत की ओर से राफेल डील पर साइन किए जाने के तीन साल बाद, सीबीआई सहित केंद्रीय एजेंसियों को दसॉ की ओर से दी गई संभावित रिश्‍वत को लेकर अलर्ट किया गया था। इसके बावजूद ये जांच एजेंसियां इन आरोपों पर पर कार्रवाई करने में नाकाम रहीं। इस तरह के आरोप भारतीय कानून के अनुसार, दसॉ कंपनी को blacklist किया जा सकता था। ऐसा नहीं हुआ और सरकार ने सौदे के लिए कंपनी से डील कर ली।
ये दस्‍तावेज (डॉक्‍यूमेंट) देश के शीर्ष नेताओं के लिए 12 अगस्‍तावेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टरों की बिक्री में कथित भ्रष्‍टाचार पर सीबीआई के आरोप पत्र का हिस्‍सा हैं। इन डॉक्युमेंट से लगता है कि सीबीआई, राफेल पर ‘निष्क्रिय’ रही है। ये बात आईटी सर्विस कंपनी IDS के तत्कालीन मैनेजर धीरज अग्रवाल के बयान से सामने आई है। उन्होंने माना है कि कंपनी दागी बिचौलिए सुशेन गुप्ता से जुड़ी है। यह मार्च 2019 की बात है।
धीरज के मुताबिक दसॉ के 40 फीसद भुगतान आइडीएस को गुप्ता की मॉरीशस वाली कंपनी इंटरस्टेलर को कमीशन के तौर पर हुए. 2003-2006 के बीच आइडीएस ने दसॉ के 4.15 करोड़ इंटरस्टेलर को भेजे। ये बात इसलिए अहम है कि भारतीय कानूनों के मुताबिक दलाली में फंसी कंपनी को सस्पेंड किया जाएगा, बैन कर दिया जाएगा। इसके बावजूद राफेल से भारत ने सौदा किया। भुगतान की अवधि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार, जो 2004 तक सत्‍ता में रही और यूपीए सरकार, जो इसके तुरंत बाद सत्‍ता में आई, तक फैली हुई है। इस गवाही को अपनी कोर्ट फाइलिंग में शामिल करने के बावजूद सीबीआई ने कंपनी के खिलाफ जांच शुरू नहीं की।