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August 6, 2026

रुद्रप्रयाग के कवि कालिका प्रसाद सेमवाल की कलम से सरस्वती वंदना-हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ

रुद्रप्रयाग के कवि कालिका प्रसाद सेमवाल की कविता-हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ।

हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ

मां शारदे मेरे मन का तिमिर हर ले
ज्ञान का दीपक जला मेरे हृदय में,
सत्य ,साहस, दया क्षमा का दान दे
हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ।

लोभ, लिप्सा का हरण कर दो
मां मन का अंधियारा का हरण कर,
जन-जन के प्रति स्नेह का भाव जागे
हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ।

विमल मति मां मन में भर दो
हृदयतल में उल्लास हो हर वक्त,
ऋद्धि, सिद्धि सुबुद्धि स्वाश्रम दात्री
हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ।

तेरे वीणा के मधुर स्वर कानों में गूंजे
वाग्देवी हे मां शारदे,
जयति जय हो तुम्हारी
हे मां शारदे अपनी करुणा बरसाओ।

कवि का परिचय
कालिका प्रसाद सेमवाल
अवकाश प्राप्त प्रवक्ता, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा।
निवास- मानस सदन अपर बाजार रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड।

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