Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

June 20, 2026

कवि एवं साहित्यकार दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’ की गढ़वाली गजल-आजादी

कवि एवं साहित्यकार दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’ की गढ़वाली गजल-आजादी।

आजादी

बड़ि कुर्बन्यूं से मिलीं आजादी, भलिके सम्माऴ
देश रक्षा कि खातिर, द्वी कदम चलिके सम्माऴ

तिल-मिल नि द्योखु वो बग्त, कानि-किस्सा सुड़ीं,
सुड़ीं बतौं बि गूण, आज दग्ड़म मिलिके सम्माऴ

सूंण ! बीरौं की परिक्षा, सदन बटि- हूंद रा यख,
बीरौं की ल्वे से पऴ्यूं छै तू, ये समऴिके सम्माऴ

शान्ति कु पाठ- नि भुलणू , गांधी जी न- जो बतै,
क्रांति कु बिगुल फूक, सुभाष थैं पढिके सम्माऴ..

समै बदल-हम नि बदला, हम रवां भोला-भाला,
ज्यूसे प्यारु-देश हमारु, ये लड़ि-लड़िके सम्माऴ

देश थैं- सूर- बीरौं चाड- लाड, सदनि बटि राई,
जौं-रै-देश प्यारु, ऊंन देशभक्त बड़िके सम्माऴ

‘दीन’ भारत देश हमरु, हमन ये- माँ समान-मान,
भारत माँ से बणु-क्वी नि, अगनै बढिके सम्माऴ

कवि का परिचय
नाम-दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’
गाँव-माला भैंसोड़ा, पट्टी सावली, जोगीमढ़ी, पौड़ी गढ़वाल।
वर्तमान निवास-शशिगार्डन, मयूर बिहार, दिल्ली।
दिल्ली सरकार की नौकरी से वर्ष 2016 में हुए सेवानिवृत।
साहित्य-सन् 1973 से कविता लेखन। कई कविता संग्रह प्रकाशित।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।