Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

June 13, 2026

आयुष प्रदेश में आयुष डॉक्टरों की उपेक्षा और शोषण: डॉ. डीसी पसबोला

डॉ. प्रो. डीसी पसबोला

विशेषकर उत्तराखंड के साथ ही अन्य आयुष प्रदेशों में आयुष का शोषण हो रहा है। आयुष में आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी डॉक्टरों शामिल हैं। इनकी मुख्य समस्याएं कम वेतन, समान कार्य के बावजूद भेदभाव, ठेका प्रथा के माध्यम से शोष, और DACP/ACP लाभों में देरी हैं। ये कहना है राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड के स्टेट मीडिया कोर्डिनेटर डॉ. प्रो. डीसी पसबोला का। उन्होंने प्रेस नोट के माध्यम से इस मामले को समझाने का भी प्रयास किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आयुष डॉक्टरों की प्रमुख समस्याएं
समान वेतन और भत्ते का अभाव: एलोपैथिक डॉक्टरों के समान घंटों और जिम्मेदारियों के बावजूद आयुष चिकित्सकों का मूल वेतन और भत्ते काफी कम हैं।
ठेका प्रथा और असुरक्षा: कई अस्पतालों में इन डॉक्टरों को ‘संविदा’ या ‘अल्प मानदेय’ पर रखा जाता है, जिससे नौकरी की सुरक्षा और उचित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
DACP और पदोन्नति में देरी: केंद्र सरकार के नियमों (DACP) के बावजूद, राज्यों में पदोन्नति और वेतन सुधार (जैसे ACP/MACP) के मामले सालों-साल लंबित पड़े रहते हैं।
दबाव व डिजिटल उपस्थिति: दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में बिना उचित इंटरनेट या तकनीकी सुविधाओं के बायोमेट्रिक/मोबाइल ऐप अटेंडेंस अनिवार्य करने से डॉक्टरों को मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इन समस्याओं के कारण और वर्तमान स्थिति
नीतिगत उपेक्षा: राज्य के स्वास्थ्य बजट और नीतियों में एलोपैथी को अधिक प्राथमिकता मिलती है, जिसके कारण आयुष सेवाओं और डॉक्टरों का समुचित विकास नहीं हो पाता।
लगातार विरोध-प्रदर्शन: अपनी मांगों को लेकर आयुष डॉक्टर अक्सर बांहों पर काली पट्टी बांधकर काम करने, ओपीडी के बहिष्कार और हड़ताल जैसे रास्तों को अपनाने के लिए मजबूर होते हैं।
कानूनी व प्रशासनिक स्पष्टता का अभाव: एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति को लेकर कई कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले भी आयुष डॉक्टरों के कार्यक्षेत्र और अधिकारों पर असमंजस पैदा करते हैं।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *